श्वान को पालने वाली ज्योति खंडेलवाल ने बताया कि भीलवाड़ा में जिस संस्था को नगर परिषद ने काम दिया वह भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड से पंजीकृत नहीं है। फिर भी संस्था ने 1090 रुपए की दर से काम किया। संस्था की ओर से रीको में जो सेन्टर बनाया गया। वहां रखे गए श्वान को खाने को कुछ भी नहीं देने कुछ श्वान की मौत हो गई थी। इसे लेकर कुछ स्थानीय संगठनों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन भी किया था। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया और ठेका निरस्त कर दिया। इसके बावजूद संस्थान को 60 लाख का भुगतान कर दिया गया। उधर संतुलन जीव कल्याण एनजीओ के डॉ. नवीस मेहरा ने बताया कि उनकी संस्था पंजीकृत है, लेकिन अज्ञानता के चलते कुछ संस्थाओं की शिकायत के बाद काम बंद कर दिया है।
ठेका निरस्त, नई निविदा जारी होगी