
Strike on roadways workers in bhilwara
भीलवाड़ा।
निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल पर उतरे रोडवेजकर्मियों के कारण भीलवाड़ा डिपो में करीब सौ से ज्यादा बसें नहीं चलने से दूसरे दिन गुरुवार को जिले के यात्री परेशान रहे।
सरकारी नीतियों के खिलाफ कर्मचारी हड़ताल पर उतरे तो बसों के चक्के थम गए। करीब सौ से ज्यादा बसें भीलवाड़ा डिपो कही नहीं चली। इससे यात्री परेशान हुए। प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण रोडवेज बसों का संचालन बंद रहने से निजी बसों व रेलवे स्टेशन पर भीड़ नजर आई। इस हड़़ताल से राजस्थान रोडवेज निगम को दो दिन में करीब 24 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ है।
इन मांगों को लेकर विरोध
वर्ष-2015 से सेवानिवृत हुए कर्मचारियों के परिलाभ सरकार ने नहीं दिए।
नई बसे खरीद की अनुमति नहीं दे रहे है। निजीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।
बस स्टैण्ड का निजीकरण करने को बढ़ावा दे रहे हैं।
कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान नहीं होता। ना ही अन्य लाभ दिए जा रहे।
कर्मचारियों को 15 से 18 घण्टे ड्यूटी कराई जाती है। ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता।
तैनात रही पुलिस
रोडवेजकर्मियों के हड़ताल पर जाने से प्रबंधन असहाय हो गया। आगार के मुख्य प्रबंधक सुधांशु नागौरी ने जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर हड़ताल को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने की मांग की। इस कारण पर्याप्त पुलिस जाप्ता स्टैण्ड पर लगा रहा।
निजी बसों में रही भीड़
रोडवेज में हड़ताल के पहले दिन बुधवार को लोगों ने निजी बसों का सहारा लिया। निजी बसों में भीड़ रही। स्थिति यह थी कि निजी बसें भी रोडवेज बस स्टैंड के बाहर आकर सवारियां ले जा रही थी। इसी तरह रेलवे स्टेशन पर भी भीड़ नजर आई।
300 कर्मचारी शामिल
राजस्थान रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक मनोहरलाल शर्मा ने बताया, भीलवाड़ा आगार के 300 कर्मी हड़ताल पर रहे। इन्होंने स्टैंड पर धरना दिया व सरकारी -नीतियों पर विरोध जताया।
Published on:
26 Jul 2018 03:54 pm
बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
