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सुनो सरकार: एसी में बैठे अफसर, तपते कमरों में नौनिहाल…भीलवाड़ा प्रशासन को शिकायत का इंतजार

शिक्षा विभाग का बेतुका तर्क- कोई ज्ञापन नहीं आया, तो कलक्टर को प्रस्ताव कैसे भेजें, छोटे बच्चे हो रहे परेशान

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Listen, Government: Officers sitting in AC, children in hot rooms... Bhilwara administration waiting for complaints

सुनो सरकार: एसी में बैठे अफसर, तपते कमरों में नौनिहाल...भीलवाड़ा प्रशासन को शिकायत का इंतजार

भीलवाड़ा जिले में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों ने आमजन का हाल बेहाल कर दिया है। आसमान से बरसती आग के बीच सबसे ज्यादा फजीहत छोटे-छोटे स्कूली बच्चों की हो रही है। एक तरफ प्रदेश के कई जिलों के संवेदनशील कलक्टरों ने भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों का समय बदल दिया है, लेकिन भीलवाड़ा जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अभी भी गहरी नींद में है। प्रशासन की इस बेरुखी के चलते नौनिहालों के बीमार पड़ने और हीट स्ट्रोक का खतरा मंडराने लगा है।

अन्य जिलों से सीख ले लो

जयपुर शहर में भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों का समय सुबह 7.30 से 11.30 बजे तक कर दिया है। वहीं, कोटा, भरतपुर, चूरू, अजमेर समेत कई अन्य जिलोंकेकलक्टरों ने भी संज्ञान लेते हुए स्कूल के समय में बदलाव कर राहत दी है। इसके विपरीत, भीलवाड़ा में चिलचिलाती धूप और लू के बावजूद प्रशासन ने समय परिवर्तन को लेकर अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। गंभीर मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का रवैया और भी चौंकाने वाला है। अधिकारियों का तर्क है कि स्कूल का समय बदलने को लेकर उनके पास अब तक किसी ने कोई आधिकारिक शिकायत नहीं की है और न ही कोई ज्ञापन सौंपा है। ऐसे में वे अपनी तरफ से जिला कलक्टर को समय बदलाव का प्रस्ताव कैसे भेजें?

एसी में अफसर, बिना पंखों के तप रहे बच्चे

प्रशासन की इस अकर्मण्यता पर अभिभावकों और बच्चों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि आला अधिकारी तो एसी कमरों में बैठकर काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें बाहर की भयंकर गर्मी और लू का अहसास नहीं हो रहा। दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि जिले के कई सरकारी स्कूलों में पूरी तरह से पंखे भी चालू हालत में नहीं हैं। तपते दोपहरी में कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। भीलवाड़ा जिले में लगातार पारा 40 डिग्री के आस-पास अटका हुआ है। सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चे सुबह साढ़े सात बजे आते है और दोपहर एक बजा स्कूल की छुट्टी होती है तो सुरजसीर के ऊपर होता है। इसके कारण हर बच्चे के बीमार होने का खतरा बना रहता है।