
बिजौलिया पंचायत समिति के खेरखेड़ा गांव में रविवार को स्वाइन फ्लू से एक और महिला की मौत के बाद सर्वे करती चिकित्सा विभाग की टीम
तिलस्वां।
जिले में स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बिजौलिया पंचायत समिति के खेरखेड़ा गांव में रविवार को स्वाइन फ्लू ने एक और महिला की जान ले ली। जिले में जानलेवा हुई बीमारी से सातवी मौत के बावजूद चिकित्सा विभाग सोया हुआ है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। गांव-गांव यह रोग फैलता जा रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग मौत को संदिग्ध मान रहा है।
जानकारी के अनुसार खेरखेड़ा निवासी ४५ वर्षीय महिला तीन दिन से सर्दी-जुकाम और बुखार से पीडि़त थी। इलाज के लिए सिंगोली (मध्यप्रदेश) और बूंदी के बाद भीलवाड़ा के निजी अस्पताल दिखाया। जहां जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। उसे उदयपुर के लिए रैफर कर दिया। महिला ने रास्ते में दम तोड़ दिया। महिला की मौत का पता चलने पर चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया।
एक टीम को गांव भेजा। वहां घर-घर सर्वे करके टेमी फ्लू टेबलेट बांटी गई। इसके अलावा ग्रामीणों को बीमारी के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। अंतिम संस्कार में सावधानी बरती गई। उधर, चिकित्सा विभाग इसे स्वाइन फ्लू नहीं मान रहा। मामले को संदिग्ध माना जा रहा है।
सात मौतों के बाद भी नहीं उठाए कड़े कदम
जिले में स्वाइन फ्लू से विधायक सहित सात लोगों की मौत होने के बावजूद चिकित्सा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। यहां तक की स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए जिले में जागरूकता अभियान तक नहीं चलाया गया। सबसे ज्यादा असर भीड़भाड़ वाले इलाकों में होने का अंदेशा है।
स्क्रब टाइफस भी पसार रहा पैर
स्वाइन फ्लू के साथ ही जिले में दो जनों के स्क्रब टाइफस पाया गया। जिसमें एक जने की मौत हो गई जबकि दूसरे का उपचार चल रहा है। जबकि चिकित्सा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
Published on:
17 Sept 2017 07:58 pm
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