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मातमी धुन के साथ निकाले ताजिए, करबला में किए सैराब

हजरत इमाम हुसैन के शहादत की याद में शहर में ताजिए निकाले गए

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Tajias were taken out with mourning tunes, and drinks were served in Karbala

Tajias were taken out with mourning tunes, and drinks were served in Karbala

हजरत इमाम हुसैन के शहादत की याद में रविवार को शहर में ताजिए निकाले गए। शहर के सभी कॉलोनियों के 14 ताजियों को रात को बड़ला चौराहा स्थित करबला में सैराब किया गया। इस दौरान पुलिस के पुख्ता प्रबंध थे। वही सांगानेर से ताजिए का जुलूस नहीं निकाला गया। यहां नए रास्ते को लेकर समाज ने ताजिए नहीं निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।

शहर के विभिन्न कॉलोनियों से 14 ताजिए निकाले गए। इनमें दादाबाड़ी, मोहम्मदी कॉलोनी, हुसैन कॉलोनी, भवानीनगर, भोपालपुरा व कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती, स्टेशन मस्जिद, आरके कॉलोनी, चपरासी कॉलोनी, पुलिस लाइन, गांधीनगर व रामनगर क्षेत्र के ताजिए शामिल थे। यह सभी रविवार सुबह अपने-अपने मुकाम से रवाना होकर रात को बाहला में नीलगरों की मस्जिद चौक पहुंचे। यहां से जुलूस ने पुरानी धानमंडी चौक में मुकाम लगाया। ढोल ताशों की मातमी धुन पर अखाड़ा प्रदर्शन किया। सर्राफा बाजार में ताजिए के पहुंचने पर प्रबुद्धजनों की दस्तारबंदी की गई। यहां से जुलूस नीलगरों का चौक, पुरानी कचहरी, पटवारियों का मंदिर, तालाब की पाल व बड़ला चौराहा होते हुए करबला पहुंचा जहां करबला सोसायटी की देखरेख में मोहर्रम ठंडे किए गए। इस दौरान शहर के सभी थानों की पुलिस व अधिकारी मौजूद थे।

प्रसाद का आदान-प्रदान

पटारियों के मंदिर में ताजिए का प्रसाद चढ़ाया गया। मंदिर से भी प्रसाद का वितरण किया। यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है। दोनों समुदाय की ओर से प्रसाद का आदान-प्रदान किया गया।

सांगानेर मुस्लिम समाज ने किया विरोध

सांगानेर मुस्लिम समाज ने ताजिए नहीं निकालने पर विरोध किया। सांगानेर गांव को खाली करके काली पट्टी बांधकर कोठारी नदी के पास स्थित मोडासा वाले बाबा के यहा एकत्रित हुए। यहां सभी ने काली पट्टी बांध कर प्रशासन के निर्णय का विरोध किया।

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