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गहलोत के सात संकल्प में कपड़ा उद्योग को स्थान नहीं

बजट से भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्यमियों को हुई निराशासांगानेर में बनेगा 30 करोड़ की लागत से हाईलेवल ब्रिजगुलाबपुरा कृषि मंडी का होगा विस्तार

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Textile industry has no place in Gehlot's seven resolutions in bhilwara

Textile industry has no place in Gehlot's seven resolutions in bhilwara

भीलवाड़ा।
Bhilwara textile entrepreneurs disappointed by budget मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को विधानसभा में पेश किए गए बजट को नया अंदाज देते हुए सात संकल्पो के आधार पर बजट सदन में रखा। लेकिन इन सात संकल्पों में उद्योग को कोई स्थान नहीं दिया गया है। इस बजट से भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योगों को बड़ी निराशा हाथ लगी है। जबकि टेक्सटाइल उद्यमी बिजली की दरों में एक से दो रुपए प्रति यूनिट से सब्सिड़ी की मांग कर रहे थे। Bhilwara textile entrepreneurs disappointed by budget वही आमजन को राहत मिली है। इसमें उपनगर सांगानेर पर कोठारी नदी पर तीस करोड़ की लागत से हाईलेबल ब्रिज बनेगा। भीलवाड़ा की पुरा सम्पदा संरक्षण के लिए बजट मिला। शहीद स्मारक बनाया जाएगा। गुलाबपुरा मंडी को फिर से स्वतंत्र मंडी का दर्जा दिया गया है। बिजौलियां में कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। भीलवाड़ा में जिले में घरेलू पेयजल योजना के साथ भीलवाड़ा के आरोली स्थित चम्बल परियोजना प्लांट से बूंदी का हिंडोली कस्बा व राजसमंद के भीम कस्बे को चम्बल का पानी दिए जाने की घोषणा की गई है। इसके लिए डीपीआर बनाई जाएगी। जिले के किसानों को दिन में भी दो ब्लाक में बिजली मिलेगी। वही रायपुर में कोर्ट खुलेगा।
इन में भी नहीं मिली राहत
औद्योगिक संगठनों ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए माल परिवहन में २ रुपए प्रति किलो की दर से फे्रड सब्सिड़ी देने की मांग कर रहे थे। भीलवाड़ा में गैस की उपलब्धता को देखते हुए उद्योगों को कॉल आधारित बॉयलर को गैस आधारित करने के लिए पूंजीगत लागत में ५० प्रतिशत की छूट की मांग की जा रही थी। भीलवाड़ा जिला को डार्क जोन श्रेणी से बाहर निकालने के लिए उद्यमी लम्बे समय से इसकी मांग कर रहे थे। ताकि भीलवाड़ा में डेनिम उद्योग को बढ़ावा मिल सके। सूक्ष्म, लधु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों को सौर ऊर्जा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने का बजट में किसी तरह का प्रावधान नहीं रखा गया। बिजली में सब्सिड़ी की मांग को लेकर मेवाड़ चेम्बर ऑफ कामर्स, भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन, सिन्थेटिक्स विविंग मिल्स एसोसिएशन, लद्यु उद्योग भारती उद्योग सचिव, उद्योग मंत्री, उद्योग आयुक्त तक से मिल चुके है। सभी ने इस मांग को लेकर आश्वासन भी दिया था, लेकिन बजट में यह मांग पूरी नहीं हुए। उद्यमियों व औद्योगिक संगठनों की माने तो बिजली दर राजस्थान का पहला राज्य है जहां सबसे अधिक दरे है।