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प्रोसेस हाउसों का काला पानी बनास में, बीसलपुर बांध पर मंडराया पानी प्रदूषित होने का खतरा

क्षेत्र में बहने वाली बनास नदी में सोमवार को एक बार फिर प्रोसेस हाउसों का काला पानी पहुंच गया। जिससे ग्रामीणों में रोष है।

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भीलवाड़ा जिले के आकोला के पास बनास नदी में आया प्रोसेेेस हाउसों द्वारा छोड़ा गया काला पानी

आकोला।
क्षेत्र में बहने वाली बनास नदी में सोमवार को एक बार फिर प्रोसेस हाउसों का काला पानी पहुंच गया। जिससे ग्रामीणों में रोष है। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की सख्ती के बावजूद प्रोसेस हाउस बनास नदी में काला पानी छोडऩे से बाज नहीं आ रहे है। बिन बारिश के छोड़े गये प्रदूषित पानी के कारण बनास प्रदूषित हो रही है। इसका असर बीसलपुर बांध तक भी देखा जा सकता है।

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प्रोसेस हाउसों द्वारा अपशिष्ट पानी को चोरी छिपे नालों में छोडऩे से अब तक आस पास के दर्जनों गांवों के खेत खलिहान उजाड़ हो चुके हैं और कई लोगों की जाने भी जा चुकी है लेकिन प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल उद्योगपतियों के आगे बेबस है। यही वजह है कि जब भी मौका मिलता है महीनों का काला पानी उद्योगपति खुले आम नदियों नालों में छोड़ देते है। सरकार ने कुछ समय पहले इस मामले को लेकर सख्ती भी दिखाई थी लेकिन हालात फिर जस के तस हो गए हैं।

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लगातार काला पानी नदी में प्रवाहित होकर त्रिवेणी संगम तक पहुंच चुका है जो धीरे-धीरे बीसलपुर बांध तक पहुंच रहा है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह पूरे बीसलपुर बांध को प्रदूषित कर देगा। वस्त्र नगरी के डेढ दर्जन प्रोसेस हाऊसों और कपड़ा उद्योग से जुड़े कुछ कारखानो के प्रदूषित पानी ने भीलवाड़ा के विकास से ज्यादा विनाश की कहानी लिख दी है। बनास और कोठारी नदी के साथ ही छोटे नालों ,कुओं, बावड़ी से लेकर भूमिगत जलस्त्रोतों के भी दूषित हो जाने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । प्रदूषण ग्रस्त क्षेत्रों के निवासी चर्म रोगों के साथ जानलेवा बीमारियों के कारण बेमौत मर रहे हैं वहीं क्षेत्र के मवेशियों की मौत का आंकड़ा भी बढता जा रहा है । खेती बरबाद हो चुकी है ,लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधि यहां काले पानी के नमूने की जांच से ज्यादा कुछ नहीं करा पाता।