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मास्टरप्लान ने बदला जमीनों का खेल, कौडि़यों की जमीन लाखों की हुई, रिकॉर्ड से गायब हो गए मूल पट्टे, भू-माफिया दबा रहे जमीन

नगर विकास न्यास की पेराफेरी में शामिल होने के बाद पंचायतों में फर्जी पट्टों का खेल होने लगा

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The bogus leases Game in bhilwara

The bogus leases Game in bhilwara

भीलवाड़ा।

नगर विकास न्यास की पेराफेरी में शामिल होने के बाद पंचायतों में फर्जी पट्टों का खेल होने लगा। पट्टे जारी करने का अधिकार पंचायतों को है। इसके चलते कई पंचायतों में मूल आवंटियों के राजस्व दस्तावेज गायब हो गए। गायब दस्तावेज की आड़ में रसूखदार जमीन हथियाने में जुट गए। मूल आवंटी अपनी पीड़ा पंचायत व थानों में लेकर पहुंच रहे है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। हाल ये है कि कौडि़यों की कीमत की जमीन के लाखों में होने से अब भू-माफिया गांवों की जमीन मुफ्त में पुराने स्टाम्प पेपर के बूते नापने में लगे हैं।


भीलवाड़ा शहरी सीमा से सटे गांवों की डेढ़ दशक पूर्व कीमत कोडि़यों में थी, लेकिन नगर विकास न्यास के भीलवाड़ा मास्टर प्लान का प्रारूप 31 मार्च 2005 को जारी होने तथा भीलवाड़ा नगर सहित 38 राजस्व ग्राम शामिल करने से गांवों की जमीनों पर भू-माफियों की नजर लग गई। 5 जुलाई 2011 को मास्टर प्लान का संशोधित प्रारूप जारी होने और 26 अक्टूबर 2016 को मास्टर प्लान लागू होने के बाद न्यास पेराफेरी में शामिल गांवों की जमीन सोना बन गई। पहले अधिकतर गांवों में भीलवाड़ा शहर के कई बाशिन्दों ने पंचायतों पर विश्वास करते हुए नीलामी में स्टाम्पों पर सौदों से जमीन खरीदी। वर्ष 1980 से 2005 के मध्य ये सौदे कौडि़यों में हुए। पुराने लोगों ने पंचायतों पर विश्वास करते तहसीलों या रजिस्ट्री कार्यालय में पंजीयन नहीं कराए।


मास्टर प्लान का संशोधित प्रारूप जारी होते ही पंचायतों में फर्जी पट्टों का खेल शुरू हुआ। आटूण पंचायत में वर्ष 1980से 2005 के मध्य जारी पट्टों का राजस्व रिकार्ड गायब हो गया। सुभाषनगर की सुनीता गुप्ता की पीड़ा है कि आटूण पंचायत ने वर्ष 1980 में शिवनारायण कॉलोनी काटी थी। उनके परिजनों ने दो भूखंड नीलामी में खरीदे। वर्ष 2010 तक उनका कब्जा था। मास्टर प्लान जारी होने के बाद पंचायत से राजस्व दस्तावेज का रिकार्ड गायब हो गया। वे अपने जमीन की चारदीवारी कराने पहुुंचे तो प्रभावशालियों ने उसे अपनी बताते हमला कर दिया। शिकायत पंचायत व सदर पुलिस को की, लेकिन प्रभावशालियों के दबाव के आगे उन्हें जान बचा कर भागना पड़ा। अब कलक्टर की शरण ली है। इसी प्रकार मूल आवंटी हरिप्रसाद माईती के परिजन भी यहां अपनी जमीन पर निर्माण को पहुंचे तो वहां कोई अन्य कब्जा जमाए बैठा मिला। पंचायत से राजस्व रिकार्ड मांगा तो यहां दो टूक ही जवाब मिला।

यहां भी गड़बड़झाला
न्यास पेराफेरी में शामिल आरजिया, हलेड़, पांसल, पालड़ी, गोविन्दपुरा, तेलीखेड़ा, सांगानेर, कुवाड़ा, सुवाणा, नई इरास, हरणीकलां, ओड़ों का खेड़ा, हरनीखुर्द, सबलपुरा, माधोपुर, गठीला खेड़ा, मंडपिया, बोरड़ा, पुर, बीलिया, मलाण किशनावतो की खेड़ी, मोखमपुरा, जीपिया, मालोला, जोधड़ास, धूलखेड़ा, भदालीखेड़ा, बीलियाकलां, नारायणपुरा, स्वरूपगंज, गुवारड़ी, काणोली,तस्वारिया, आकोला, भोली व सालरिया में हाइवे क्षेत्र में जमीनों की कीमतें आसमां
छूने लगी है। जमीनों परकब्जे का खेल यहां भी हो रहा है। भूमाफिया मूल आवंटियों के दस्तावेज को फर्जी साबित कर उन्हें बेदखल कर चुके है या एेसी कोशिश में जुटे हैं।

पेराफेरी के गांवों का विकास यूआईटी करा रही है। यहां खेतीहर भूमि के पट्टे पंचायत स्तर पर जारी हुए। कृषि भूमि पर कॉलोनी काटने के मामलों में पट्टों पर रोक है। यदि खातेदार 90 ए करवा लेते हैं और कॉलोनी बनाते हैं तो सेक्टर व जोनल प्लान के जरिए पट्टे जारी किए जा सकते हैं। पंचायतों के राजस्व रिकार्ड ही नामांतरण व अधिकार के लिए पात्र है। फर्जी पट्टों की शिकायतें न्यास को भी विभिन्न स्तरों पर मिली है, इस बारे में पंचायतों से रिकार्ड भी तलब किया है।
आशीष शर्मा, सचिव यूआईटी