
घर-घर सर्वे से पहले हांफती शिक्षा व्यवस्था: सैकड़ों पद खाली, कई शिक्षक जनगणना में
भीलवाड़ा जिले में 1 अप्रेल से नया शिक्षा सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे ठीक पहले 27 मार्च से शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए बड़ा हाउस होल्ड सर्वे (घर-घर सर्वे) शुरू होगा। लेकिन, शिक्षा विभाग का यह अभियान शुरू होने से पहले ही विभागीय बदइंतजामी और संसाधनों के टोटे के बीच दम तोड़ता नजर आ रहा है। जिले की शिक्षा व्यवस्था खुद भारी चुनौतियों से जूझ रही है। कहीं पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं, तो कहीं बच्चों के बैठने के लिए सुरक्षित छत तक मयस्सर नहीं।
जिले में शिक्षा का ढांचा शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में सैकडों शिक्षकों के पद रिक्त हैं। हालात यह हैं कि 80 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। कोढ़ में खाज यह कि करीब 200 से अधिक शिक्षकों को आगामी जनगणना कार्य में लगाया जाएगा। इसके अलावा लगभग 300 शिक्षक विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों तहसील, उपखंड, बीईईओ और कलेक्ट्रेट में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर लगे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि नए सत्र में बच्चों को पढ़ाएगा कौन और सर्वे कौन करेगा।
समग्र शिक्षा अभियान विभाग के अनुसार जिले में पहले 200 स्कूल भवन जर्जर पाए गए थे, जो पुनः सर्वे में 139 रह गए हैं। इनमें से करीब 20 जर्जर भवनों को जमींदोज किया जा चुका है। वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर कई स्कूल अब भीड़भाड़ वाले अन्य सरकारी भवनों, किराए के कमरों या फिर खुले में संचालित किए जा रहे हैं।
शिक्षक नेता नीरज शर्मा ने बताया कि सर्वे का मुख्य उद्देश्य 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों (नेवर एनरोल्ड और ड्रॉपआउट) की पहचान करना है जो स्कूल से बाहर हैं। यह विशेष अभियान चार चरणों 27 मार्च, 6 अप्रेल, 10 अप्रेल और 15 अप्रेल में चलेगा।
परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन हमें उपलब्ध संसाधनों के साथ ही कार्य पूरा करना होगा। जहां शिक्षकों की कमी है, वहां पीईईओ क्षेत्र से वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
राजेन्द्र प्रसाद गग्गड़, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)
Published on:
19 Mar 2026 08:59 am
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