
The 'gravel mafia' is fearless in Bhilwara, the Mineral Department's list exposes 'black spots' in 14 tehsils.
भीलवाड़ा जिले में अवैध खनन का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब नदियां ही नहीं, बल्कि सरकारी और चरागाह भूमि भी सुरक्षित नहीं है। खनिज विभाग की ओर से तैयार की गई संवेदनशील सूची ने जिले के प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। इस सूची में जिले की 14 तहसीलों के उन प्रमुख क्षेत्रों (प्रोन एरिया) को चिन्हित किया गया है, जहां 'बजरी' और अन्य कीमती खनिजों का अवैध दोहन चरम पर है। सबसे बड़ी चौकाने वाली बात यह है कि अवैध बजरी का दोहन पुलिस थाना क्षेत्रों में अधिक हो रहा है। बजरी का परिवहन भी थाना क्षेत्र की सीमा से हो रहा है। कुछ स्थानों पर एमबीसी के जवान तक तैनात है, लेकिन वे भी केवल मूंक दर्शक बने रहते है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भीलवाड़ा, हमीरगढ़, आसींद और जहाजपुर जैसी तहसीलों में बजरी का अवैध खनन सबसे अधिक हो रहा है। इसके अलावा, जहाजपुर, मांडलगढ़ और कोटड़ी क्षेत्र में 'गार्नेट' जैसे बेशकीमती पत्थरों की भी जमकर चोरी हो रही है।
हैरानी की बात यह है कि खनिज विभाग के पास एक-एक गांव और एक-एक खसरे की जानकारी है जहां अवैध खनन हो रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इन माफियाओं पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अधिकांश अवैध खनन राजकीय भूमि और चरागाह भूमि पर हो रहा है, जो सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
केवल कागजों पर क्षेत्र चिन्हित करने से खनन नहीं रुकेगा। जब तक माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा और पुलिस की गश्त केवल कागजों तक सीमित रहेगी, तब तक भीलवाड़ा की प्राकृतिक संपदा इसी तरह लुटती रहेगी।
भीलवाड़ा जिले में अवैध खनन को रोकने के लिए विभाग लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है और क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
महेश शर्मा, खनिज अभियंता भीलवाड़ा
Published on:
22 Feb 2026 08:34 am
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