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जन-जन के जीवन में अहिंसा-संयम-तप की जरूरत

12 किलोमीटर का किया भ्रमण
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 29 Oct 2021, 10:35 PM IST

जन-जन के जीवन में अहिंसा-संयम-तप की जरूरत

जन-जन के जीवन में अहिंसा-संयम-तप की जरूरत

भीलवाड़ा।
मानव कल्याण, जन-जन में सद्भाव, नैतिक पथ दिखाने और नशामुक्ति के लिए 50 हजार किमी की पदयात्रा कर चुके आचार्य महाश्रमण ने शुक्रवार को भिक्षु विहार से प्रस्थान किया। रास्ते में लोगों को आशीर्वाद दिया। नगर के नेहरू उद्यान, अंबेश भवन, रामद्वारा, अजमेर चौराहा, बसंत बिहार, गांधीनगर, स्वाध्याय भवन, रामधाम, ट्रांसपोर्ट मार्केट लगभग 12 किमी का विहार कर चतुर्मास प्रवास स्थल पहुंचे व प्रवचन दिया।
आचार्य ने कहा कि अहिंसा सुख और शांति देने वाला तत्व है। दु:ख हिंसा से प्रसूत होते हैं तो अहिंसा से सुख पैदा होता है। आदमी को जीवन में अहिंसा के पथ पर चलने का प्रयास करना चाहिए। मन, वाणी व काया का संयम हो। शरीर से अशुभ की निवृत्ति इस रूप में हो कि संयम हो जाए तो साधना अच्छी हो सकती है। आदमी को अपने जीवन में संयम बढ़ाने और जीवन को संयमित बनाने का बनाने का प्रयास करना चाहिए। हमारा जीवन अहिंसा, संयम और तप की साधना में लगे। जीवन में अहिंसा, संयम और तप आ जाए तो जीवन का कल्याण हो सकता है। गिनीज वल्र्ड रिकार्ड होल्डर विराट वानखेड़े ने गीत पेश किया।