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बूंद—बूंद के नाम पर उठाए लाखों रुपए की किसानों को भनक तक नहीं लगने दी, इस घपले पर एसीबी ने कसा शिकंजा

उद्यान विभाग में बूंद-बूंद सिंचाई परियोजना में हुए लाखों के घोटाले कराने वालों पर अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शिकंजा कस दिया है

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The Parks Department filed a scandal in bhilwara

The Parks Department filed a scandal in bhilwara

भीलवाड़ा।

भीलवाड़ा के उद्यान विभाग में बूंद-बूंद सिंचाई परियोजना में हुए लाखों के घोटाले कराने वालों पर अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शिकंजा कस दिया है। विभाग के चार अफसरों और कम्पनी मालिकों के खिलाफ एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर ली है। परिवाद की प्रारंभिक जांच में दोषी माना गया है। इनमें उद्यान विभाग के सहायक निदेशक समेत अन्यों को आरोपित बनाया गया है। दिलचस्प पहलु तो यह है कि इन अफसरों के खिलाफ विभाग ने भी जांच की थी। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी अब भी वह पद पर बरकरार है।

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भीलवाड़ा ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश गुप्ता ने बताया कि भीलवाड़ा उद्यान विभाग के सहायक निदेशक रामकिशोर मीना, तत्कालीन सहायक निदेशक भूपेन्द्रसिंह, कृषि अधिकारी राकेश कुमार माला व केके वर्मा तथा बूंद-बूंद सिंचाई के उपकरण उपलब्ध कराने वाली कम्पनी सैनी इंजीनियरिंग के किशनलाल व उसके बेटे को नामजद किया गया। बाप-बेटे ने अलग-अलग नाम से कम्पनी का रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है। इस एफआईआर एएसपी गुप्ता की ओर से दर्ज की गई। इस मामले की गुप्ता ने परिवाद की जांच की थी।

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सब्सिडी उठाई, मौके पर प्लांट नहीं
जांच में पाया कि किसानों के नाम पर विभाग से परियोजना के माध्यम से सब्सिडी उठाई गई, जबकि मौके पर किसी तरह का प्लांट ही नहीं लगाया। जिन किसानों के नाम पर लाखों रुपए उठाए गए, उन्हें किसी तरह की जानकारी ही नहीं है।
कम्पनी ने सब्सिडी उठाई और विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर मौका देखे बिना उसे तस्दीक कर दिया। खुद उद्यान विभाग इस मामले की जांच कर चुका है। इस मामले में नामजद रामकिशोर मीना को विभाग ने आरोप पत्र भी थमाया है। मामले में तभी से ब्यूरो भी जांच में जुटा था। ठीक ऐसे ही मामले में चित्तौड़ व टोंक में भी सामने आए हैं। वहां भी एसीबी मामलों की पड़ताल कर रही है।