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चलने का बल नहीं मतदान करने का बुजूर्गों में दिखा जज्बा

भीलवाड़ा नगर परिषद क्षेत्र

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चलने का बल नहीं मतदान करने का बुजूर्गों में दिखा जज्बा

चलने का बल नहीं मतदान करने का बुजूर्गों में दिखा जज्बा

भीलवाड़ा।
शरीर में ताकत नहीं मुंह की बोली स्पष्ट नहीं। आवश्यकता पड़ती है दूसरे के सहारा लेने की। लोग पकड़कर मतदान केंद्र पर लाए थे बुजूर्ग मतदाताओं को तो कुछ लाठी टेककर पहुंचे थे मतदान केंद्र। शहर के एमएलवी कॉलेज के वयोवृद्ध रणजीतसिंह ओरडिय़ा (१०१) भी आए थे मतदान करने। ओरडिय़ा अपने पुत्र व पोती के साथ मतदान करने के बाद एक दूसरे के सहारे मतदान केंद्र से बाहर निकलने पर उन्होंने कहा कि हर बार मतदान किया था। इस बार भी नहीं रहा गया तो मतदान करने आ गया। कुम्भा छात्रावास स्थित मतदान केन्द्र के बाहर एक वृद्धा ९५ साल की थी। वह उम्र के इस अंतिम पड़ाव पर मतदान करने पहुची थी। उसका कहना था कि जीवन रहे या न रहे लेकिन मतदान का मौका उन्हें पांच साल बाद ही मिलेगा। आस-पास के लोगों से पूछा कि मतदान करुं या न करुं तो लोगों ने कहा कि मतदान कीजिए। इसलिए मतदान करने आ गई। ९३ वर्षीय कंचन देवी जागेटिया ९३ ने भी अपने मताधिकार का उपयोग किया। उनका मतदान केंद्र घर से पास ही थी। चलने फिरने में असमर्थ थे। लेकिन उनके पुत्र ने उन्हें अपने वाहन से मतदान कराने के लिए मतदान केंद्र पर लाया। बिना किसी के सहारे के कंचन देवी ने मतदान किया। वही कई मतदान केन्द्रों पर वयोवृद्ध अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर पहुंच रहे थे। एर बुजूर्ग महिला व्हील चेयर पर बैठकर मतदान करने पहुंची थी। उनके चेहरे पर खुशी के भाव झलक रहे थे।