
The ride of Ghas Bawji starts after blood vaccination in bhilwara
भीलवाड़ा।
जिले के गेंदलिया में घॉस बावजी की सवारी निकाले से पहले किसी मनुष्य के खून देने के बाद ही सवारी निकलती है घास बावजी की। भले ही आपको आश्चर्य लग रहा है लेकिन यह सत्य है कि जीवित मनुष्य का खून देने के बाद गेन्दलिया कस्बे में घास बावजी की सवारी निकाली जाती है। परम्परा के अनुसार घास बावजी की सवारी दीपावली के दूसरे दिन खेखरा की रात्रि में ग्रामीण ढोल -नगाड़ों के साथ एकत्रित होकर हनुमानजी, घॉस भेरू को नुत कर गांव में स्थित छतीस करोड़ देवताओं के यहां पूजा अर्चना की जाती है। यहां किसी भी मनुष्य का खून निकालकर परसा के भैरुनाथ पर विराजमान छतीस देवताओं को खून के टीके (तिलक) लगाकर हनुमान जी के मंदिर से ढोल नगाड़ों के साथ गांव के लम्बरदार तिवाड़ी परिवार की प्रथम बेलो की जोड़ी घॉस बावजी को खींचकर शुभारंभ करती है। गांव में रोगो से बचाव व गांव में सुख-शांति, सम्रद्धि, अच्छी बारिश के लिए साल में एक बार खेखरा के दिन घास बावजी की सवारी निकाली जाती है। घॉस बावजी की सवारी अलग-अलग बेलो की जोडिय़ों के माध्यम से खिंची जाती है। पूरे गांव में सवारी निकाली जाती है। अंत मे विसर्जन होता है। सवारी को देखने के लिए जिले भर के लोग यहां गेन्दलिया आते है।
Published on:
16 Nov 2020 09:28 pm
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