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दीक्षा में पूर्वजन्म के संस्कारों का योग

आचार्य महाश्रमण का धर्म-संवाद
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 27 Aug 2021, 10:20 PM IST

दीक्षा में पूर्वजन्म के संस्कारों का योग

दीक्षा में पूर्वजन्म के संस्कारों का योग

भीलवाड़ा।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि कोई व्यक्ति दीक्षा लेता है तो पृष्ठभूमि में कई कारण होते हैं। उसके पिछले जन्मों के संस्कार, स्मृतियां भी दीक्षा की निमित्त बनते हैं। स्वप्न में किसी को देवता प्रतिबोध देते हैं तो भी दीक्षा की भावना जाग्रत हो जाती है। कोई अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए भी प्रव्रज्या ग्रहण कर सकता है। रोग आदि के कारण भी भोगों से उन्मुख होकर व्यक्ति संयम ग्रहण को प्रेरित हो सकता है। आचार्य ने कहा कि परिवार में कोई व्यक्ति दीक्षित होता है तब भी कई बार व्यक्ति के भीतर विरक्ति की भावना जागृत हो जाती है। हमारे धर्मसंघ में भी देखे तो कितने ही माता-पुत्र, पिता-पुत्र, भाई-बहन, बहनें और कोई पूरे परिवार के साथ दीक्षित है। संयम जीवन का पालन कर रहे है। विषय भोगों का त्याग करके ही व्यक्ति मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
साध्वी मूलांजी की स्मृति सभा
आचार्य के सानिध्य में साध्वी मूलांजी की स्मृति सभा हुई। तेरापंथ धर्मसंघ में कच्छ, गुजरात क्षेत्र से दीक्षित प्रथम साध्वी थी। 73 वर्षों के संयमपर्याय में 1 अगस्त 2021 को लूनकरनसर में देवलोकगमन हो गया। मुनि महावीर कुमार, साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा, साध्वी संबुद्धयशा, मुनि अनंत कुमार, साध्वी गौरवयशा, साध्वी नवीनप्रभा, साध्वी केवलयशा ने विचार व्यक्त किए। आचार्य ने विमल डागा, अंकिता डागा को अठाई के तप का प्रत्याख्यान करवाया।