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फिर क्यों जन्में यहां रावण दुर्योधन से शोषक

महिला काव्य मंच की ऑनलाइन प्रथम काव्य गोष्ठी

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Then why was born here exploited by Ravan Duryodhana in bhilwara

Then why was born here exploited by Ravan Duryodhana in bhilwara

भीलवाड़ा।
अन्तरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच की भीलवाड़ा इकाई की प्रथम गोष्ठी ऑनलाइन हुई। महिला काव्य मंच अध्यक्ष और कार्यक्रम की संचालक कवयित्री राजश्री रतावा ने बताया कि काव्य गोष्ठी में जिले की 8 कवयित्रियों ने भागीदारी निभाई और विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। मां शारदे की स्तुति के साथ कार्यक्रम का आरम्भ कवयित्री अर्पिता दाधीच की राम जन्मभूमि पर रची गई कविता के साथ हुआ। धरा, त्योम, पाताल लोक में गूंज रहा है नाम जैसी उम्दा पंक्तियों के साथ पूरा मंच रामरस से सराबोर हो गया। उसके बाद कवयित्री राजश्री रतावा ने बेटी का जीवन पर बहुत ही मार्मिक रचना प्रस्तुत की। फिर क्यों जन्में यहां रावण दुर्योधन से शोषक जैसी पंक्तियों के साथ उनकी रचना ने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया। कवयित्री मंगला शर्मा ने नदी के पार कविता द्वारा मंच को शृंगार रस से सौन्दर्यमय कर दिया।
कवयित्री विजयश्री ने जीवन की परिभाषा को बहुत ही सुंदर और उम्दा तरीके से प्रस्तुत किया। कवयित्री शिल्पा दाधीच ने भाभी पर एक भावभरी रचना प्रस्तुत करते हुए ननद भाभी के रिश्ते को दोस्ती की एक नई परिभाषा दी। महिमा सोनी ने माँ पर एक बहुत सुंदर रचना माँ तो माँ होती है जैसी पंक्तियों के साथ सभी को भावविभोर कर दिया। मनाली सेन ने शहीद के परिवार की भावनाओं को अपनी मार्मिक रचना द्वारा बखूबी प्रस्तुत किया और हम क्यों नहीं सुधर रहे अब बंद करो चीन से व्यापार जैसे कटु सत्य को परिलक्षित करती जनमानस से स्वदेशी अपनाने की अपील की। राजनंदिनी सेन ने माँ के सागर से गहरे स्वभाव को माँ तुम कितनी नरम होती हो, बच्चों की गलतियों पर कितनी जल्दी गर्म होती हो, जैसी पंक्तियों में बाँधकर प्रस्तुति दी।