नए सदस्य बनेंगे और पुराने मजबूती से जुड़े रहेंगे तो संगठन मजबूत होगा, संगठन की मजबूती के लिए सत्ता पक्ष के बड़े नेता यह कर भी रहे है, बैठकों व भाषणों में उनका पूरा फोकस यही है कि अधिक से अधिक सदस्य बनाए जाए, लेकिन कहने, करने व करवाने में बड़ा फर्क है, यही सब कुछ अब साफ भी नजर आ रहा है। चर्चा है कि डिजिटल सदस्यता के लिए कोई राशि देय नहीं होने के बावजूद जो उत्साह दिखना चाहिए वह नजर नहीं आ रहा है, वरिष्ठ तो दबी जुबान में अब यह भी कहने लगे है कि संगठन की बजाए अब व्यक्तिगत टीम बनाने की भावना पनपने लगी है, जो संगठन के लिए ठीक नहीं है।