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inside story of Bhilwara यह है भीलवाड़ा की अंदर की बात

चर्चा है कि गत दिनों जिले में ब्लॉक स्तर पर मौजूदा अध्यक्षों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए नेताओं ने खुली चर्चा की। उनके ब्लॉक के हालत जाने, लेकिन दिल्ली तक रसूखात वाले नेताजी के क्षेत्र में दोनों ही ब्लॉक अध्यक्षों को बुलाया नहीं।
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भीलवाड़ा

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Narendra Kumar Verma

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Updated: 13 Jun 2022, 12:51 PM IST

यह है भीलवाड़ा की अंदर की बात

यह है भीलवाड़ा की अंदर की बात

नरेन्द्र वर्मा This is the inside story of Bhilwara कांग्रेस में चिंतन एवं मनन का मौका अब स्थानीय स्तर पर होगा। यह चिंतन एवं मनन बंद कक्ष में नहीं वरन खुले स्थल यानी कार्यशाला में होगा, लेकिन बोलने वाले को कौन रोक सकता है, वे तो बोलेगे ही। चर्चा है कि गत दिनों जिले में ब्लॉक स्तर पर मौजूदा अध्यक्षों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए नेताओं ने खुली चर्चा की। उनके ब्लॉक के हालत जाने, लेकिन दिल्ली तक रसूखात वाले नेताजी के क्षेत्र में दोनों ही ब्लॉक अध्यक्षों को बुलाया नहीं। यहां के बीआरओ की भी नहीं चली। वह भी ब्लाॅक अध्यक्षों से मिले बिना अपनी रिपोर्ट थमा कर अपने-अपने घर चले गए।


यह अनजान चेहरे
यूआईटी में सब कुछ ठीक है, यह नहीं कहा जा सकता है। हालात यह है कि कांग्रेस के अनजान चेहरे पर भी यहां अपनी धाक जमाने को मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वे अपने आप को सुर्खियों में लाने की कोशिश में धरना-प्रदर्शन की चेतावनी तक देने लगे हैं। कुछ की यूआईटी के बाहर धरने पर बैठने की चेतावनी से वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी सकते में है। वे यह समझ नहीं पा रहे है कि उनकी सरकार के कामकाज व अभियान को लेकर यह अनजान क्यों परेशान है। इधर, यूआईटी की बजट बैठक के स्थगित होने के पीछे सचिव व एसई के बीच तनातनी की भी चर्चा है।


कर दिया सपना साकार
पुलिस थानों में अब दो स्टार यानी उपनिरीक्षक स्तर के कर्मियों के राज जाने वाले हैं। लेकिन विदाई सम्मानपूर्वक हो, इसलिए होनहारों के लिए टाइगर ने नई राह खोल दी। उन्होंने कई बड़े थाने का सपना साकार कर दिया। उनकी किस्मत चेत गई जो आरपीएल में नौकरी बजा रहे थे। चर्चा है कि जल्द उनकी भी तकदीर जागने वाली है जो अजमेर रेंज से बाहर वनवास काट रहे हैं। उनकी वापसी के साथ ही अन्य रेंज से आए निरीक्षक शहर व हाईवे के थानों पर नजर गढ़ाए हैं। ये चर्चा भी खास है कि तबादलो´ में एक बड़े नेता की ही अधिक चली है।

भूल गए बाड़मेर व जैसलमेर
बेरोजगारी से त्रस्त युवाओं का हाल था कि बाडमेर व जैसलमेर तक में नौकरी करने को तैयार थे। पूरी जिन्दगी यहां समर्पित करने के लिए अदद सरकारी नौकरी की गुहार कर रहे थेद्य। सरकारी नौकरी मिली तो उनके सुर ही बदल गए। सीमावर्ती जिले दूर की बात है, अब जिले में ही बिजौलियां, मांडलगढ़, रायपुर, जहाजपुर, आसींद, हुरड़ा, गुलाबपुरा उपखंड क्षेत्र में नौकरी करना भारी लग रहा है। राज्य सरकार ने तबादलों से पाबंदी हटाई तो ऐसे ही क्षेत्र में दो या तीन साल पहले नौकरी पर लगे कर्मचारियों की डिजायर सर्वाधिक मंत्रियों, विधायकों व वरिष्ठ नेताओं के पास पहुंच रही। जिले के कई नेताओं ने तो ऐसे कर्मियों को उनके पुराने दिन भी याद दिला दिए, लेकिन उन की सेहत पर कोई असर ही नजर नहीं आ रहा है।