भूल गए बाड़मेर व जैसलमेर
बेरोजगारी से त्रस्त युवाओं का हाल था कि बाडमेर व जैसलमेर तक में नौकरी करने को तैयार थे। पूरी जिन्दगी यहां समर्पित करने के लिए अदद सरकारी नौकरी की गुहार कर रहे थेद्य। सरकारी नौकरी मिली तो उनके सुर ही बदल गए। सीमावर्ती जिले दूर की बात है, अब जिले में ही बिजौलियां, मांडलगढ़, रायपुर, जहाजपुर, आसींद, हुरड़ा, गुलाबपुरा उपखंड क्षेत्र में नौकरी करना भारी लग रहा है। राज्य सरकार ने तबादलों से पाबंदी हटाई तो ऐसे ही क्षेत्र में दो या तीन साल पहले नौकरी पर लगे कर्मचारियों की डिजायर सर्वाधिक मंत्रियों, विधायकों व वरिष्ठ नेताओं के पास पहुंच रही। जिले के कई नेताओं ने तो ऐसे कर्मियों को उनके पुराने दिन भी याद दिला दिए, लेकिन उन की सेहत पर कोई असर ही नजर नहीं आ रहा है।