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यह है पत्थरों का गांव कांस्या

This is the village of stones, Bronsa at bhilwara अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा भीलवाड़ा जिले से 90 किलोमीटर दूर बिजौलियां क्षेत्रस्थित कांस्या गांव की कुल आबादी 2500 के करीब है। देश में यह गांव कांस्या खान के नाम से प्रसिद्ध है । यहां से निकलने वाला पत्थर यानि सैंड स्टोन राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, उत्तरप्रदेश सहित पूरे भारत व विदेशों में भी निर्यात होता हैं।

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This is the village of stones, Bronsa

This is the village of stones, Bronsa

भीलवाड़ा। अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा भीलवाड़ा जिले से 90 किलोमीटर दूर बिजौलियां क्षेत्रस्थित कांस्या गांव की कुल आबादी 2500 के करीब है। देश में यह गांव कांस्या खान के नाम से प्रसिद्ध है । यहां से निकलने वाला पत्थर यानि सैंड स्टोन राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, उत्तरप्रदेश सहित पूरे भारत व विदेशों में भी निर्यात होता हैं। लाल पत्थर की खदानों से निकलने वाली पट्टियां मकान बनाने व छतों को ढकने के काम में ली जाती है। कुछ वर्षों से आरसीसी के छत डालने से पट्टियों की मांग नगरीय क्षेत्र में नाम मात्र की रह गई। ग्रामीण अंचल में भी लाल पत्थर की मांग थोड़ी कमी हुई है।

दूरदराज से आते है कमाने

वर्तमान में इस क्षेत्र का लाल पत्थर व नीला पत्थर को निर्यात किया जाता है। कांस्या व आसपास के अधिकांश गांवों में मकानों की छतें लाल पत्थर से ढकी हुई है। यहां जिले के आसींद, बदनोर के साथ ही अजमेर जिले के बिजनयनगर, केकडी, ब्यावर, मध्यप्रदेश के झाबुआ, बांसवाड़ा आदि स्थानों से रोजग़ार के लिए हजारों संख्या में लोग मजदूरी से जुड़े हुए है। शिक्षा को लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालय बना हुआ है।

एरू नदी से बहा विकास
कांस्या में पुलिस चौकी स्थापित है। पीने के पानी के लिए चम्बल परियोजना की पानी की पाइप लाइन है। उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक आदि सुविधाएं उपलब्ध है। वहीं एरू नदी गुजरने से पर्याप्त मात्रा में पानी होने से नलकूप व कुएं आदि का जल स्तर ऊंचा बना रहने से पानी की कमी नहीं है। आवगमन के लिए कांस्या प्रमुख मार्गों से जुड़ा हुआ है। जो भीलवाड़ा, कोटा, बूंदी, चित्तौड़, नीमच जिले के मध्य होने से केंद्र बिन्दू भी है।

पांच किमी दूर एमपी

कांस्या के समीप में मध्यप्रदेश की सीमा पांच किलोमीटर दूरी पर होने से व्यापार आधा मध्यप्रदेश से होता है। इस गांव के 20 किमी परिधि में
ऐतिहासिक स्थान मेनाल झरना, शक्ति पीठ जोगणिया माता मन्दिर, तिलस्वां महादेव मंदिर, मंदाकनी मंदिर, पाश्र्वनाथ तीर्थ मंदिर बिजौलिया, माला देवी मंदिर सहित धार्मिक तीर्थ पर्यटक स्थल मौजूद है।

साबू देवी कहती है करेंगे विकास

कांस्या ग्राम पंचायत की साबू देवी बंजारा प्रथम बार सरपंच बनी है और गांव में विकास कार्यो में लगी हुई है। सरपंच साबू देवी कक्षा दो तक पढ़ी हुई है। परिवार की पृष्ठभूमि राजनीति से कोई नाता नहीं रहा है। एक छोटे से गांव काटबड़ा में रहने के बाद ग्राम पंचायत में नौ अन्य महिलाएं सरपंच पद दावेदारी के बाबजूद भी चुनाव लड़ा ओर विजय हांसिल की।

सरपंच बनने के दो वर्ष से ग्राम पंचायत की मूलभूत सविधाओं में सुधार में लगी हुई है। सरपंच साबू देवी ने बताया कि पंचायत कार्यालय में समय पर बैठने से ग्रामीणों को भी मदद मिलती है और समस्याओं का निस्तारण भी समय पर किया जा रहा है। वह बताती है कि गांव ही नहीं समूचे ग्राम पंचायत का सर्वांगीण विकास हो, इसके लिए वह प्रयास रत है।