वीरानें में नहीं, पालना में छोड़े
बच्चें घर के नौनिहाल होते है, चाहे वह किसी की कोख से जन्में और कही पर इनका लालन पालन हो, लेकिन बच्चों को त्यागनें वालों को चाहिए कि वह निष्ठुरता नहीं दिखाएं। जरुरत किसी को नहीं है तो वो जंगल या खुले में नहीं फेंके, पालना गृह में छोड़ जाए, ताकि वो सुरक्षित रह सकें, ऐसे बच्चे अब अभागे नहीं रहे है। खुले में छोडऩे से कानूनी जटिलता बढ़ जाती है, जबकि पालना गृह में छोडऩे से पुलिस कार्रवाई से बचा जा सकता है।
डॉ. राजेश छापरवाल, सदस्य बाल कल्याण समिति, भीलवाड़ा