
This village of Bhilwara is called Chhoti Kashi
jasraj ojha. मकानों में दरारों के कारण पुर कस्बा देशभर में चर्चा में है। दरारों की जांच के लिए आइआइटी रुड़की सहित कई नामी संस्थाओं के इंजीनियर यहां आ रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यहां आकर दरारें देख चुके हैं। दिवाली बाद दरारों के कारणों की जांच होगी। बहरहाल, पुर पांच सौ से अधिक वर्ष पुराना है। इसके साक्ष्य भी मौजूद हैं। यहां एक दर्जन से अधिक प्रमुख मंदिर सहित कई पुरातत्व स्थल हैं। पुर को छोटा काशी भी कहा जाता है। पर्यटन विभाग ने इन्हें प्रमुख स्थल भी घोषित कर रखा है। पुर को लेकर राजस्थान पत्रिका में एक विशेष शृंखला के तहत अब प्रमुख स्थलों की जानकारी दी जाएगी।हवा में लटक रही है यह छतरी
पुर की उडऩछतरी एक चट्टान पर टिकी हुई है। यह चट्टान एेसी है, जो हवा में झूल रही है। यहां तीन छतरियां हैं। एक पर संवत् १८७० का इतिहास लिखा है तो एक पर विक्रम संवत १०२३ अंकित है। पुर निवासी निर्मल सिंघवी के अनुसार किंवदंती है कि यह उडऩछतरी किसी तांत्रिक की ओर से आकाश मार्ग से उड़ाकर ले जाई जा रही थी। किसी दिगम्बरी सम्प्रदाय के भट्टाचार्य जैन यतिजी ने अपनी विद्या के प्रभाव से छतरी को यहां उतार लिया। जब इनके भट्टाचार्यजी का निधन हुआ, जब उनका अंतिम संस्कार इस छतरी पर किया गया था। यहां उनका स्मारक बनाकर पगल्या व विक्रम संवत १०२३ अंकित है। इस पहाड़ी पर ही भगवान देवनारायण मंदिर है। यह मंदिर भी एक चट्टान पर है। यहां की भौगोलिक स्थिति पर्यटकों को आश्चर्यचकित करती है। यहां से पुर कस्बे का आकर्षक नजारा दिखता है। यहां पहुंचने का रास्ता आसान है। पहाडि़यों के बीच से यहां पर पहुंचा जा सकता है।
Published on:
20 Oct 2019 05:01 am
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