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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से टेक्सटाइल उद्योग को जबर्दस्त झटका, 150 करोड़ के कपड़े पर लगा ब्रेक, जॉब पर काम की एक शिफ्ट बंद, हजारों श्रमिक हुए बेरोजगार

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Transporter's strike in bhilwara

Transporter's strike in bhilwara

भीलवाड़ा।
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर अब टेक्सटाइल सेक्टर पर पडऩे लगा है। वस्त्रनगरी से प्रतिदिन जाने वाले करीब 25 से 30 करोड़ के कपड़े की गांठें नहीं जा पा रही है। जबकि जॉब पर काम करने वाले उद्यमियों को भी काम नहीं मिल रहा है। इसके चलते कई विविंग उद्योगों में एक शिफ्ट का काम बन्द कर दिया गया है। इससे मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।


ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्टर कांग्रेस की अगुवाई में 20 जुलाई से अनिश्चित कालीन हड़ताल चल रही है। हड़ताल से कपड़ा कारोबार सबसे अधिक प्रभावित रहा। कपड़ा व्यापारी 19-20 जुलाई से ही देश के किसी भी कौने व अन्य राज्यों के शहरों में कपड़ा नहीं भेज पा रहे है। एक अनुमान के अनुसार यहां प्रतिदिन 25 से 30 करोड़ का कपड़ों की गांठे ट्रकों व निजी बसों के माध्यम से बाहर भेजा जाता है। जो कि फिलहाल बंद है। ऐसे में मुम्बई, दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, हरिद्वार, बड़ौदा सहित अन्य स्थानों पर कपड़े की गांठे नहीं जा पा रही है। पिछले पांच दिनों सवा सौ से डेढ़ सौ करोड़ का कपड़ा व्यापार चौपट हो रहा है।

श्रमिक हुए बेरोजगार
भीलवाड़ा टेक्सटाइल फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल शर्मा का कहना है कि जॉब पर काम करने वाले उद्यमियों के सामने भी एक नया संकट खड़ा हो गया है। जिन कम्पनियों के जॉब यहां हो रहा है। उसके यहां से न तो यार्न आ रहा ना ही अन्य सामान। इसके चलते कई विविंग इकाइयों में एक शिफ्ट का काम बन्द कर दिया गया। इससे श्रमिक भी बेरोजगार हो गए।

ट्रांसपोर्टरों की यह मांग
ट्रांसपोर्टरों का कहना है, इ-वे बिल में गलती पर जुर्मानेे का डर है। अधिकारी नरमी बरतें, डीजल दाम रोज के बजाय त्रैमासिक बदलें। राष्ट्रीय स्तर पर एक समान हो। 3 या 6 माह में बढ़ाए जा रहे टोल के रेट को वन टाइम करें। टीडीएस हटाने व थर्ड पार्टी बीमा के बढ़ते दाम पर अंकुश जैसी मांगों लेकर 20 जुलाई से देश भर के ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर हैं।