
डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट(डीएमएफटी ) के खजाने में सबसे ज्यादा योगदान भीलवाड़ा जिले का है। लेकिन अब इसे खर्च करने में जिले के सरकारी विभागों ने हाथ खड़े कर दिए हैं
भीलवाड़ा।
डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट(डीएमएफटी ) के खजाने में सबसे ज्यादा योगदान भीलवाड़ा जिले का है। लेकिन अब इसे खर्च करने में जिले के सरकारी विभागों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका तर्क है कि इतना बजट खर्च करने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन है और न ही प्रस्ताव है। खनिज ट्रस्ट में अभी करीब 570 करोड़ रुपए पड़े हुए हैं। इसमें से अब तक मात्र 215 करोड़ रुपए की स्वीकृतियां निकली है।
इसमें भी अभी तक आधे काम भी चालू नहीं हो पाए हैं। खुद जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने डीएमएफटी की समीक्षा की तो वे भी चौंक गए। उन्होंने विभागवार रिपोर्ट लेकर कम प्रगति पर नाराजगी जताई है। जिला कलक्टर ने बताया कि जिले के पास पर्याप्त बजट है और इससे जनता की जरुरतों को पूरा किया जा सकता है। इसके बावजूद भी अधिकारी इस तरह ढिलाई बरत रहे हैं। उन्होंने काम नहीं करने वाली एजेंसी की जगह दूसरी एजेंसी बनाने को कहा है। इसमें ग्राम पंचायतों को कार्यकारी एजेंसी बनाने पर सरकार भी सहमत नहीं है। एेसे में अब दूसरे विकल्प देख रहे हैं।
कलक्टर इसलिए नाराज क्योंकि नहीं बन रहा पैमाना
जिला कलक्टर चाहते हैं कि खनिज ट्रस्ट का 60 फीसदी पैसा शिक्षा व स्वास्थ्य में खर्च हो। ये दोनों ही विभाग काम कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। 40 फीसदी सिंचाई व अन्य विभागों में खर्च होना है।
अब जिस हिसाब से यह अनुपात तय कर रखा है वह बैठ नहीं रहा है। इस कारण जिला कलक्टर विभागों की प्रगति से नाराज है। गौरतलब है कि मांडलगढ़ उपचुनाव के समय बजट के लिए लड़ाई हुई थी, अब पैसा लेने से भी सब मना कर रहे हैं।
02. सार्वजनिक निर्माण विभाग
स्थिति -123करोड़ रुपए के 118 काम स्वीकृत किए हैं। 75 के ही टेंडर हुए है। इसमें भी 61 ही चालू हुए। अब तक केवल चार काम पूरे हुए है। पीडब्ल्यूडी ने चिकित्सा विभाग के काम करने से मना कर दिया है। उनका तर्क है कि सड़कें बनाने में उलझन ज्यादा है, इसलिए दूसरों का काम नहीं कर सकते हैं।
02. जलदाय विभाग
स्थिति- 18 करोड़ 86 लाख 79 हजार रुपए के 92 काम स्वीकृत किए। इनमें से 58 के टेंडर हुए है। 42 काम प्रारंभ हुए है और केवल 9 काम ही पूरे हुए है। जलदाय विभाग के सारे काम चंबल परियोजना में हो रहे हैं। इसलिए विभाग के पास अब काम ही नहीं बचे हैं। इसलिए नए प्रस्ताव देने में भी पसीना आ रहा है।
03. राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान
स्थिति- 54 करोड़ 54 लाख रुपए के 161 कामों की स्वीकृतियां दी गई। अब तक मात्र 53 काम के ही टेंडर हुए है। इसमें भी केवल 27 काम चालू हो पाए। एक भी काम पूरा नहीं हुआ है। रमसा अधिकारियों का तर्क है कि इनके पास एक्सईएन नहीं है। एेसे में 30 लाख से ज्यादा का काम नहीं ले सकते हैं।
04. सर्व शिक्षा अभियान
स्थिति- सात करोड़ 33 लाख रुपए के 78काम स्वीकृत किए। अभी तक एक भी काम का टेंडर नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि स्कूलों में पूरे कक्षाकक्ष ही नहीं है। अब अधिकारियोंं का तर्क है कि उनके व रमसा के एईएन एक ही है। एेसे में दो जगह काम नहीं कर सकते हैं।
05. चिकित्सा विभाग
स्थिति- 02 करोड़ 57 लाख रुपए के 470 काम स्वीकृत किए। इसमें से सभी कामों के टेंडर हो चुके हैं। अब पीडब्यूडी ने मेडिकल के काम करने से मना कर दिया है। अब इसमें सिंचाई विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाने पर विचार चल रहा है। चिकित्सा विभाग भी काम कराने को तैयार नहीं है।
कुूछ विभागों ने नहीं दिए प्रस्ताव
&हम सभी विभागों से प्रस्ताव मांग रहे हैं। साथ ही समीक्षा भी की है। कुछ विभागों की निविदा भी नहीं हुई। अब कुछ विभागों ने नए प्रस्ताव भी नहीं दिए है। इस बजट को सही जगह करने के लिए बैठक भी हुई है। इसकी समीक्षा कर उचित जगह खर्च किया जाएगा।
कमलेश्वर बारेगामा, सदस्य सचिव, डीएमएफटी व खनि अभियंता
Published on:
14 Apr 2018 01:30 pm
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