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जमीन पर इलाज: कम पड़े बेड तो बेंच पर लिटाए मरीज

एमजीएच: ट्रोमा वार्ड से हर दिन हो रहे दो से तीन मरीज रैफर

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जमीन पर इलाज: कम पड़े बेड तो बेंच पर लिटाए मरीज

जमीन पर इलाज: कम पड़े बेड तो बेंच पर लिटाए मरीज

भीलवाड़ा. मौसम में बदलाव ने महात्मा गांधी अस्पताल के इंतजाम बिगाड़ दिए। अस्पताल के लगभग वार्ड मरीज भार से दबे हैं। कई वार्डों में बिस्तर कम पड़ गए तो मरीजों का इलाज जमीन पर लिटाकर किया जा रहा है। वहीं कुछ वार्ड में बेंच को बेड में बदला गया है। अिस्थ रोग के आउटडोर में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। ट्रोमा वार्ड से गंभीर मरीजों को रैफर किया जा रहा है। रविवार को छट्टी होने के बावजूद एमजी अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिली।

एमजीएच में प्रतिदिन 500 से 550 मरीज केवल सर्दी-खांसी, बुखार, उल्टी-दस्त, घबराहट की शिकायत लेकर आ रहे हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों का बुखार 5 से 7 दिन में टूट रहा है। मेडिकल पुरुष वार्ड में लगभग बेड भरे हुए हैं। मरीजों के बेंच या जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। महिला व बच्चों के वार्ड के अलावा आईसीयू लगभग फुल है। अस्पताल प्रशासन को मरीजों के लिए पलंगों की कमी खल रही है।

दिखाया उदयपुर-अजमेर का रास्तानिजी चिकित्सालयों की हड़ताल से सड़क दुर्घटना के सभी मरीज एमजी अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्हें पहले अस्पताल के ट्रोमा वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। यहां प्रारम्भिक उपचार के बाद अजमेर या उदयपुर रैफर किया जा रहा है। नर्सिंगकर्मियों का कहना था कि सिर में चोट या अन्य गंभीर बीमारी के चलते 19 से 26 मार्च तक 26 मरीज रैफर किए गए।
आर्थोपेडिक में ओपीडी बढ़ी

एमजीएच में इन दिनों अिस्थ रोगियों की संख्या दोगुनी हो गई। 19 मार्च से पहले औसतन 200 मरीज प्रतिदिन आते थे। अब उनकी संख्या बढ़कर 300 से 325 तक पहुंच गई है। वहीं पहले जहां 35 मरीजों को प्लास्टर चढ़ाया जाता था, वो आंकड़ा अब 45 हो गया। एक्सरे कराने वालों की संख्या भी बढ़ गई।
डायलिसिस मरीजों की संख्या बढ़ी

एमजीएच में डायलिसिस के लिए दस मशीन है। पहले 7-8 मरीज प्रतिदिन आते थे। अब हड़ताल के कारण इनकी संख्या बढ़कर 14 से 15 हो गई है। एमजीएच में डायलिसिस निशुल्क होता है जबकि निजी में इसका खर्चा 1200 से 1500 रुपए आता है।
बुखार से परेशान मरीज

मेल मेडिकल में भर्ती रामकिशन ने बताया कि शनिवार रात अचानक बुखार आया। अस्पताल आया तो डॉक्टर ने भर्ती कर लिया। वार्ड में पलंग नहीं थे। बेंच पर लिटाया गया। लोकेश कुमार ने बताया कि बुखार और हाथ-पैरों में दर्द है। थोड़ा आराम लगा है, लेकिन पेट में अब भी दर्द बना है। वार्ड में लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
इनका कहना है....

अस्पताल में आने वाले हर मरीज का उपचार किया जा रहा है। किसी की हालत ज्यादा खराब है तो उसे भर्ती भी कर रहे हैं। इसके कारण मेल मेडिकल वार्ड में पलंग कम पड़ रहे हैं। हालांकि हर हाल में इलाज कर रहे हैं। डॉ. अरुण गौड़, अधीक्षक एमजीएच