
हमें रास्तों की जरूरत नहीं है, हमें तेरे पैरों के निशान मिल गए है...
भीलवाड़ा सकल दिगंबर जैन समाज व सेवा ग्रुप की ओर से रविवार को नगर परिषद सभागार में आचार्य विद्यासागर महाराज के विनयांजलि दी गई। इसमें भीलवाड़ा शहर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सभागार खचाखच भरा था। आचार्य के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्जज्लन से शुरुआत हुई।
शालू जैन ने सुविता से भाव जताए। कहा-वो अंतिम क्षण थे विदाई के, तुम निर्मोही हो चले गए। युग दृष्टता है अन्तर्यामी पर काल के हाथों चले गए। कवि पंकज जैन ने गीत सुनाया-हमें रास्तों की जरूरत नहीं है। हमें तेरे पैरों के निशान मिल गए हैं। सेवा ग्रुप के विवेक बाकलीवाल ने कहा कि विद्या के सागर कभी खत्म नहीं हो सकते हैं। शरीर में एक बूंद भी जल है तो हमारे गुरुवर आचार्य विराजमान है। सुशील शाह ने कहा कि सेवा ग्रुप आचार्य के दर्शन के लिए वर्ष 2013, 2016 व 2022 में भीलवाड़ा से ट्रेन लेकर गया है। वे राजस्थान के थे और रहेंगे। विनयाजंलि सभा का संचालन जयकुमार पाटनी ने किया।
ये बोले जनप्रतिनििध
-आचार्य के बताए मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ी विनयांजलि होगी।-सुभाष बहेडि़या, सांसद
-आचार्य का मानव जाति के लिए कार्य अद्भुत है। उन्हें हम ही नहीं बल्कि धरती मां भी नहीं भूलेगी।- विधायक अशोक कोठारी
-आचार्य भारत रत्न के हकदार हैं। वे श्रेष्ठ संत थे। राकेश पाठक, सभापति
-त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति थे आचार्य। वास्तव में विद्या के सागर थे। लक्ष्मीनारायण डाड, पूर्व सभापति
उन्होंने जताए भाव
सुभाषनगर मंदिर से अरविंद अजमेरा, आरके कॉलोनी मंदिर से सुनील सेठी, बिचला मंदिर से विजय पापडीवाल, कल्पध्रुम बड़ा मंदिर से लोकेश अजमेरा, सुखमाल चौधरी, राकेश पाटनी, पुष्पकुमार शाह, नन्दलाल झांजरी, प्रवीण चौधरी, संजय जैन, नवीन चौधरी, पीयूष सेठिया, सोहनलाल गंगवाल, सुरेन्द्र छाबड़ा ने भाव जताए।
पाठशाला का नामकरण किया
चन्द्रशेखर आजादनगर की आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में संचालित पाठशाला का नामकरण आचार्य विद्यासागर जैन संस्कार पाठशाला किया। इसका पोस्टर का विमोचन किया।सभा में शहर के सभी जैन मंदिरों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी व सर्व समाज के लोग शामिल हुए। विजयसिंह पथिक नगर में कीर्ति स्तंभ पर शाम को 1008 दीपक से आरती की गई।
Published on:
26 Feb 2024 09:33 am
