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अंधविश्वास ने फिर ली मासूम की जान, दो माह की नवजात को गर्म सलाखों से दागने से मौत

डाम लगाने के परिणामों को जानने के बाद भी मासूमों को सलाखों से दागकर मौत के मुंहाने तक ले जाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं बच रही

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डाम लगाने के परिणामों को जानने के बाद भी मासूमों को सलाखों से दागकर मौत के मुंहाने तक ले जाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं बच रही

भीलवाड़ा।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डाम लगाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही। डाम लगाने के परिणामों को जानने के बाद भी मासूमों को सलाखों से दागकर मौत के मुंहाने तक ले जाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं बच रही। इस साल में डाम लगाने की दूसरी घटना हो चुकी है। शनिवार को काछोला कस्बे में रहने वाले एक नवजात को उसी की मां ने कस्बे में ही रहने वाले एक वृद्ध के पास ले जाकर डाम लगवा दिया। पहले ही सांस फूलने से पीडि़त बालक को डाम लगाते समय फूटी चीत्कार से न तो वृद्ध का दिल पसीजा और न ही मां का। गर्म सलाखों से उसे दाग दिया गया। जब उसकी हालत और बिगड़ गई तो परिजन उसे उपचार के लिए मातृ एवं शिशु चिकित्सालय ले आए, जहां उसकी हालत गंभीर होने से उसकी मौत हो गई।

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जानकारी के अनुसार काछोला कस्बे में रहने वाले नाथूलाल कालबेलिया का दो माह का पुत्र दिनेश पिछले तीन-चार दिनों से निमोनिया से पीडि़त था। बालक का सांस फूल रहा था। शनिवार को सांस फूलने पर मां सूरजा उसे पास में ही रहने वाली एक वृद्धा श्रृंगारी बाई के कहने पर कस्बे में ही रहने वाले एक वृद्ध के पास ले गई, जहां बालक के सीने पर गर्म सलाखों से डाम लगा दिया गया। डाम लगाने के बाद बालक की हालत और बिगड़ी तो कस्बे के बाहर मजदूरी करने गए पिता को बुलाया।

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बाद में बालक को उपचार के लिए मातृ एवं शिशु चिकित्सालय लाया गया। यहां शिशु रोग चिकित्सक डॉ. सरिता काबरा ने उसकी जांच की और प्राथमिक उपचार के बाद भी हालत काबू में नहीं होने पर उसे उपचार के लिए हाई सेन्टर अजमेर रेफर करने की तैयारी शुरू की। बालक को रेफर किया ही जा रहा था कि उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर एमजीएच चौकी पुलिस ने बालक के शव को मोर्चरी में रखवाकर काछोला थाना पुलिस को सूचना दी।

मां की मानसिक हालत ठीक नहीं
बालक के पिता नाथूलाल ने बताया कि उसकी पत्नी सूरजा की मानसिक हालत ठीक नहीं है। शनिवार को वह मजदूरी करने गया था, पीछे से पास में ही रहने वाली एक वृद्धा श्रृंगारी देवी के कहने पर उसकी पत्नी बच्चे को डाम लगाने के लिए कस्बे में ही किसी वृद्ध के पास ले गई। डाम लगाने के बाद जब हालत बिगड़ी तो उसे फोन कर बुलाया गया। बाद में बालक को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। डाम लगाने वाला वृद्ध कौन है, इसकी उसे भी जानकारी नहीं है।

दो सालों में तीन की मौत

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. सुमन त्रिवेदी ने बताया कि पिछले दो सालों में डाम लगाने की घटनाओं में एक बालिका व दो बालकों की मौत हो गई और एक दर्जन की हालत बिगड़ गई। डाम लगाने वाले आरोपितों के खिलाफ ार्रवाई भी की गई, बावजूद इसके डाम लगाने की घटनाओं का नही थमना चिंता का विषय है।

हालात गंभीर थी

शनिवार दोपहर बाद बालक को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। उस समय भी उसकी हालत गंभीर थी। निमोनिया होने के साथ ही उसकी सांस फूल रही थी। ऑक्सीजन देने के साथ ही अन्य सभी प्राथमिक उपचार किए, लेकिन हालात में सुधार नहीं आया। इस पर उसे हाई सेन्टर अजमेर के लिए रैफर करने की तैयारी ही थी कि ४:४० बजे उसने दम तोड़ दिया।
डॉ. सरिता काबरा

शिशु रोग चिकित्सक