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भ्रष्टाचार में नपे दो पुलिस अफसर, सुभाषनगर थानाप्रभारी अजयकांत और भीमगंज प्रभारी भूपेश निलंबित

Two police officers suspended for corruption सुभाषनगर थानाप्रभारी अजयकांत शर्मा और भीमगंज थानाप्रभारी भूपेश शर्मा को सोमवार को निलंबित कर दिया गया

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Two police officers suspended for corruption in bhilwara

Two police officers suspended for corruption in bhilwara

भीलवाड़ा।

Two police officers suspended for corruption सुभाषनगर थानाप्रभारी अजयकांत शर्मा और भीमगंज थानाप्रभारी भूपेश शर्मा को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और प्रतिबंधित नशीली दवा की धरपकड़ के बाद हुए लाखों के घालमेल की शिकायतों पर सोमवार को यह कार्रवाई की गई। जिले में पहली बार दो थानाप्रभारियों के निलंबन की इस कार्रवाई पर पुलिस में खलबली मच गई। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। इस मामले से जुड़े अन्य कई अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भूपेन्द्र यादव ने बताया कि ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे और प्रतिबंधित नकली दवा में अनियमितता बरतने व अवैध वसूली की शिकायत मिली थी। इसकी जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (विजिलेंस) नारायणसिंह टोंग्स से करवाई गई। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर दोनों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

Two police officers suspended for corruption इसलिए नपा सीआइ अजयकांत

जहां पकड़ा वहां नहीं दिखाया, थाना बदला, 30 घंटे बाद छोड़ा
२२ फरवरी को सुभाषनगर पुलिस ने सात लाख की प्रतिबंधित नशीली दवा पकड़ी थी। पार्सल के जरिए आगरा से बस में आई दवा पटरी पार गंगापुर तिराहा स्थित चिराग ट्रेवल्स एजेंसी (प्रतापनगर थाना क्षेत्र) से पकड़ी गई थी। मामले को प्रतापनगर थाने में नहीं दिखाकर सुभाषनगर थानाप्रभारी अजयकांत ने गायत्री आश्रम के निकट कार में दवा ले जाते दो थोक दवा विक्रेताओं राजेन्द्र भंडारी व सुरेशचंद समदानी की गिरफ्तारी दर्शाई। पुलिस ने ट्रेवल्स संचालक को हिरासत में लेकर 30 घंटे तक सुभाषनगर थाने में बैठाए रखा। उसे छोडऩे में मोटी रकम के लेनदेन की शिकायत डीजीपी तक गई। सबूत के तौर पर सीसी कैमरे के फुटेज भी भेजे गए।

इसलिए गिरी सब इंस्पेक्टर भूपेश पर गाज
Two police officers suspended for corruption ऑनलाइन सट्टे में लाखों की वसूली

12 फरवरी को भीमगंज पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे व हवाले कारोबार का पर्दाफाश कर तीन जनों को गिरफ्तार किया। आरोपी एेप के जरिए सट्टा लगाते थे। इस मामले में भी मुकदमा दर्ज करने में घालमेल हुआ। कोतवाली क्षेत्र से सट्टा पकड़ा और मामला भीमगंज थाने में दिखाया गया। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने पत्रकार वार्ता में बताया था कि जिन लोगों ने आरोपियों से आइडी लेकर मोबाइल पर सट्टा लगाया। उनकी सूची तैयार कर कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों को 15 दिन तक रिमांड पर रखा गया। उनसे आइडी लेने वाले करीब सौ लोगों की सूची बनाई गई, लेकिन एक को भी नहीं पकड़ा गया। गिरफ्तारी के नाम पर आइडी लेने वालों को धमकाकर पुलिसकर्मियों ने जमकर वसूली की। इस वसूली से पुलिस अधिकारी चर्चा में आ गए। कई नामी लोगों को भी गिरफ्तार नहीं करने के नाम पर मोटी रकम लेने की शिकायत है। इस प्रकरण में थानाप्रभारी भूपेश शर्मा की शिकायत भी डीजीपी तक पहुंची।
विजिलेंस ने की जांच

डीजीपी यादव ने दोनों मामलों की जांच विजिलेंस के एएसपी टोंग्स को सौंपी। टोंग्स जांच के लिए गत माह भीलवाड़ा आए थे। प्रतापनगर थाने में संबंधित लोगों के बयान लिए। दोनों मामलों की फाइल साथ ले गए थे।

व्यापारी को थप्पड़ विवाद

गत दिनों शहीद चौक में दुकान के बाहर खड़ी बाइक को लेकर भीमगंज थानाप्रभारी भूपेश ने व्यापारी को थप्पड़ जड़ दिया था। गुस्साए व्यापारियों ने बाजार बंद करवा थाने के बाहर प्रदर्शन किया था। भूपेश को हाथ जोड़कर व्यापारियों से माफी मांगनी पड़ी थी। यह मामला भी डीजीपी तक पहुंचा। उस समय डीजीपी ने पुलिस अधीक्षक से बात कर नाराजगी भी जताई थी। इसके अलावा एक संगठन की ओर से शहर में पोस्टर लगाने को लेकर भी विवाद हुआ था। संगठन ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की थी। यह मामला भी जयपुर तक पहुंचा था।

पहले भी लग चुका खाकी पर दाग

जिले में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं। इसी साल पुर थाने में तैनात सहायक उपनिरीक्षक कमलेश कुमार समेत कुछ पुलिसकर्मियों ने कंटेनर में अवैध बजरी ले जाते चालक को पकड़ लिया था। उसकी पिटाई कर अवैध वसूली की। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रामेश्वर सिंह ने दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसीप्रकार सवाईपुर चौकी प्रभारी रामकिशोर बेड़ा को भी बजरी के मामले में लापरवाही बरतने पर निलंबित किया गया था। इसके अलावा सवाईपुर चौकी पर लगे दो पुलिसकर्मियों को भी एनडपीएस मामले में कार्रवाई नहीं करने पर एसीबी के शिकंजे में आने के बाद निलंबित कर दिया था। इसके अलावा विभिन्न मामलों में करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर भी किया गया।