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लोन के लिए जिला उद्योग केंद्र से ‘पास  बेरोजगारों को बैंक कर रहे हैं ‘फेल

केन्द्र सरकार की बेरोजगारों को ऋण मुहैया कराने की योजनाओं को बैंक पलीता लगा रहे हैं

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केन्द्र सरकार की बेरोजगारों को ऋण मुहैया कराने की योजनाओं को बैंक पलीता लगा रहे हैं

भीलवाड़ा ।
केन्द्र सरकार की बेरोजगारों को ऋण मुहैया कराने की योजनाओं को बैंक पलीता लगा रहे हैं। जिला उद्योग केन्द्र बेरोजगारों के ऋण आवेदन तैयार कर विभिन्न बैंकों को भेजता है लेकिन बैक खामियां निकाल आवेदन निरस्त कर देते है। मंगलवार को गांधीनगर के यूनियन बैंक के मैनेजर पर तेजाब हमला भी लोन को लेकर हुआ था। हालांकि आरोपित की फाइल में दस्तावेज पूरे नहीं होने से ऋण स्वीकृत नहीं किया गया था।

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जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक राहुल देव सिंह का कहना था कि वस्त्रनगरी में सैकड़ों कम्पनियां कपड़ा, धागा, सहित कई प्रकार का उत्पादन कर रही है। हम चाहते हैं कि उद्योगों सेे ज्यादा लोगों को रोजगार मिले। यदि एक व्यक्ति उद्योग लगाएगा तो कई लोगों को रोजगार मिलेगा। इसलिए विभिन्न योजनाओं में अनुदान पर ऋण दिलाने में मदद करते हैं। हकीकत यह है कि इस दावे के बावजूद लोगों को ऋण नहीं मिलने की शिकायत रहती है।

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भामाशाह रोजगार सृजन योजना में 533 आवेदनों में मात्र 187 युवकों को ही बैंक ने ऋण मंजूर किया। इसमें भी 40 से 50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई। इसी तरह उद्योग केन्द्र में 121 आवेदन प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत बैंकों को भेजे लेकिन 48 ही मंजूर हुए।

भामाशाह रोजगार योजना के 533 आवेदन बैंकों को भिजवाए लेकिन मात्र 187 में ऋण स्वीकृत हुआ। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में आवेदक को ऋण स्वयं बैंक देते है। लेकिन इसमें भी बैंक ऋण जारी करने में आनाकानी करता है। ऐसे में जिला उद्योग केन्द्र के अधिकारी इन फाइलों को अपने पास लेकर उसे भामाशाह योजना से जोड़कर ऋण दिलाने का प्रयास करते है। पिछले साल 180आवेदन मुद्रा के थे, उन्हें भामाशाह योजना से ऋण दिया गया है।

नहीं मिलता युवाओं को लाभ
युवाओं के साक्षात्कार के बाद आवेदन बैंकों को भेजते है, लेकिन फाइलों में खामियां निकाल लौटा दी जाती है। फाइल में कमी है तो युवक से एक बार में सभी दस्तावेज मांग लो ताकि समय पर ऋण मिल सके। लेकिन कई बैंक ऐसा नहीं करते है। उन्हें अपना ऋण डूबने की चिन्ता रहती है।
राहुल देव सिंह, महाप्रबन्धक जिला उद्योग केन्द्र


ऋण पास कराने का प्रयास करते हैं
कोई भी बैंक अधिकारी अपनी जोखिम पर ऋण पास नहीं करेगा। ऋण छोटा हो या बड़ा। फाइल पूरी तैयार करने के बाद ही ऋण दिया जाता है। यूनियन बैंक की मंगलवार की घटना दुखद है। ऐसे अपराधी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जिला उद्योग केन्द्र से आने वाले आवेदनों में ऋण पास करने का प्रयास करते हैं।
राजेन्द्र प्रसाद लढ्ढा, लीड बैंक मैनेजर