भीलवाड़ा. भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय के मातृ एवं शिशु इकाई में बुधवार को नवजात के बदले जाने की घटना सामने आने से हंगामा मच गया। हालांकि दोनों ही परिवार की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया, लेकिन इस घटना से मातृ एवं शिशु इकाई फिर विवाद में है।
पुर निवासी दिनेश विश्नोई की पत्नी टीना विश्नोई को बुधवार तड़के तीन बजे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके साथ ही इसी वार्ड में बीगोद के दीपक की पत्नी हिमिशा सिंधी को भी भर्ती करवाया गया। दोनों का प्रसव सीजेरियन से हुआ। पहले सिजेरियन में हिमिशा सिंधी के पुत्र हुआ। जबकि टीना ने पुत्री को जन्म दिया। लेकिन कर्मचारी ने बाहर आकर टीना का दो बार नाम पुकारा। यही बड़ी चूक हुई। कर्मचारी की लापरवाही से हिमिशा का बेटा टीना को सौंप दिया गया।
लेकिन बीस मिनट बाद फिर टीना का नाम पुकारा गया। इस बार टीना के परिजनों से कहा कि आपके बेटी हुई। यह कहते हुए बेटी को सौप दिया। यह सुनते ही टीना के परिजनों की खुशी कुछ पल में ही काफुर हो गई। थोड़ी ही देर में यहां हंगामा खड़ा हो गया। टीना के परिजनों का कहना है कि स्टाफ ने पहले 2 बार बेटा होने की आवाज लगाई और बेटा ले जाने की बात कही, लेकिन 20 मिनट बाद स्टॉफ अपनी गलती को छुपाने के लिए परिजनों को भला बुरा कहने लगे। विवाद के बढ़ते देख स्टॉफ ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर परिजनों को समझाने का प्रयास किया। इसी बीच एमजीएच के अधीक्षक डॉ. अरुण गोड़ समेत अन्य डॉक्टर मौके पर पहुंचे तथा घटना की जानकारी ली।
आवाज टीना लगाई थी
हिमिशा के साथ आई आशा सहयोगिनी पुष्पा का कहना है कि कर्मचारी ने बाहर आकर टीना का नाम लिया। था। जबकि वह बच्चा हिमिशा का था। क्योंकि पहले सिजेरियन हिमिशा का डॉ. नवीन भडाणा ने किया था। भड़ाना का कहना है कि हिमिशा के लडका हुआ है। नवजात की मां को शुगर होने से बच्चा हेल्दी हुआ है। जबकि टीना का सिजेरियन महिला डॉक्टर ने किया था। जो विवाद के बाद मौके से नदारद थी।
दो बच्चों की हो चुकी मौत
गौरतलब है कि एमसीएच में गत दिनों दो बच्चों की एनआईसीयू वार्ड में वार्मिंग मशीन में ओवर हिटिंग से मौत हो गई थी। इसे लेकर दो संविदा कर्मचारियों की सेवाए समाप्त कर दी थी। जबकि पांच जनों को नोटिस जारी किए गए थे।
दोनो पक्षों को समझाया
दोनो नवजात के परिजनों को समझा दिया है। फिर भी वे अगर किसी तरह का जांच चाहते है तो लिखित में लिखकर देने को कहा है। शिकायत मिलती है तो जांच करवाई जाएगी।
डॉ. अरुण गौड, अधीक्षक एमजीएच भीलवाड़ा