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PIC: तालाब में डूबे तीन बच्चों की मौत से व्यथित ग्रामीणों ने चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक घंटे में जुटाए दो लाख

तालाब में डूबे तीन बच्चों की मौत से व्यथित ग्रामीणों ने चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक घंटे में करीब दो लाख रुपए जुटा लिए

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PIC: तालाब में डूबे तीन बच्चों की मौत से व्यथित ग्रामीणों ने चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक घंटे में जुटाए दो लाख

ब्राह्मणों की सरेरी ।
कस्‍बे केे तालाब में डूबे तीन बच्चों की मौत से व्यथित ग्रामीणों ने चिकित्सा व्यवस्था के लिए दो घंटे में करीब दो लाख रुपए जुटा लिए। ग्रामीणों द्वारा एकत्र की गई यह राशि कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में विभिन्न चिकित्सा सुविधाएं जुटाने के लिए खर्च की जाएगी।

5 सितंबर को ब्राह्मणों की सरेरी कस्बे के तालाब में गणपति विसर्जन के दौरान चार बच्चे डूब गए। जिन्हें कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां उनका समय पर इलाज शुरू नहीं हो सका। यदि उनका समय पर उपचार शुरू हो जाता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। गांव में चिकित्सा व्यवस्था जुटाने के लिए ग्रामीणों ने बड़ा मंदिर चौक में बच्चों को श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर एक घंटे में दो लाख रुपए एकत्रित किए। जिन्हें कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा सुविधाएं जुटाने पर खर्च किया जाएगा। सभी में बड़ी संख्या में बड़े-बुजुर्ग एवं महिलाओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सरपंच नरेंद्र कुमार सोनी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष कमलेश सिरोठा, पूर्व सरपंच डॉक्टर प्रदीप व्यास सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

इससे पूर्व ग्रामीणों ने पूरे कस्बे में कैंडल मार्च निकाला एवं दो मिनट का मौन रखकर मृत बच्चों को श्रद्धांजलि दी। इस श्रद्धांजलि सभा के दौरान ग्रामीणों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक उपकरण की कमी को पूरा करने के लिए ग्रामीणों ने दो लाख रुपए एकत्रित किए। जिससे कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक उपकरण खरीदे जा सके। ग्रामीणों ने इस पहल को लगातार जारी रखने की इच्छा व्यक्त की। श्रद्धांजलि सभा में समय पर चिकित्सा व्यवस्थाएं नहीं मिलने से भी ग्रामीण खासे नाराज दिखाई दिए।


आठ डॉक्टर, चार कमरें
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र चार कमरे है। केंद्र में आठ चिकित्सक कार्यरत हैं बारिश के समय पूरे भवन की छत टपकती है। भवन के चारों तरफ कटीली झाड़ियां एवं घास उगी हुई है। यहां आने वाले मरीजों के लिए भी हर समय जहरीले जंतुओं के काटने का भय सताता रहता है। इसी समस्या को लेकर तहसीलदार रामनिवास मीणा को ज्ञापन देकर चिकित्सालय में स्टॉप बढ़वाने एवं नए भवन निर्माण की मांग की है। चार कमरों के कारण मरीज ज्यादा होने पर जमीन पर लिटाकर ही उपचार करना पड़ता है।

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