पधारो हमारी वस्त्रनगरी, देखो यहां के पर्यटन एवं एतिहासिक स्थल

मिनी मैनचेस्टर कहे जाने वाले भीलवाड़ा जिले की पहचान पर्यटन के क्षेत्र में भी होने लगी है। किसी जमाने में प्रदेश में खनिजों का अजायबघर कहा जाने वाले जिले के अधिकांश हिस्से प्रकृति की गोद में हैं। प्रदेश के केंद्र बिंदु कहे जाने वाले भीलवाड़ा के आसपास के प्राकृतिक, पुरातात्विक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के दर्शनीय स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

By: Narendra Kumar Verma

Published: 27 Sep 2019, 09:29 PM IST

नरेन्द्र वर्मा

भीलवाड़ा। मिनी मैनचेस्टर कहे जाने वाले भीलवाड़ा जिले की पहचान पर्यटन के क्षेत्र में भी होने लगी है। किसी जमाने में प्रदेश में खनिजों का अजायबघर कहा जाने वाले जिले के अधिकांश हिस्से प्रकृति की गोद में हैं। प्रदेश के केंद्र बिंदु कहे जाने वाले भीलवाड़ा के आसपास के प्राकृतिक, पुरातात्विक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के दर्शनीय स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसके साथ ही यहां की फड़ पेंटिंग एवं लोककला में भी देश-विदेश के लोग रुचि दिखाने लगे हैं। मेवाड़ की गंगा बनास, बेड़च, खारी, मेनाली व कोठारी नदी इस क्षेत्र की पहचान हैं। यह बात अलग है कि न पर्यटन स्थलों को विकसित करना तो दूर सरकार उनके स्वरूप को भी बरकरार नहीं रख पा रही है। यही कारण है कि विश्व पर्यटन के नक्शे पर भीलवाड़ा जिले के दर्शनीय स्थलों को उचित स्थान नहीं मिल पाया है।

मांडलगढ़ व बनेड़ा के एेतिहासिक दुर्ग व बदनोर, शाहपुरा के राजमहल के साथ ही मेनाल एवं बिजौलियां के प्राचीन देवालय, जन-जन के आस्था केंद्र सवाईभोज मंदिर, रामनिवास धाम, त्रिवेणी संगम और तिलस्वां महादेव जिले में हैं। घने जंगल के बीच, मेनाल का झरना, झीलें, जलाशय भी आकर्षक हैं। इसके अलावा फ ड़ चित्रकला और भवई व गैर नृत्य, मांडल का प्रसिद्ध नाहर नृत्य व बहरूपिया कला भी भीलवाड़ा की पहचान है। भीलवाड़ा शहर में स्मृति वन, शिवाजी गार्डन, नेहरू गार्डन, गांधी सागर, मानसरोवर झील बच्चों से लेकर बड़ों के पसंदीदा स्थल हैं। देवरिया बालाजी मंदिर, हरणी महादेव मंदिर आस्था के गढ़ व पर्यटन केन्द्र हैं।

शहर भी खूबसूरत
उपनगर पुर झील-जलाशयों व पर्वतों से घिरा छोटा, लेकिन खूबसूरत स्थान है। यहां धार्मिक, प्राकृतिक एवं पर्यटन महत्व के स्थलों में देवडूंगरी, पातोला महादेव, अधरशिला, क्यारा का हनुमानजी, नीलकंठ महादेव , घटाराणी, नृसिंह द्वारा, लाडूडय़ा डूंगर व राज सरोवर शुमार हैं। इसी प्रकार सांगानेर में प्राचीन गढ़, कबीर द्वारा तथा सिंदरी के बालाजी नामक सुरम्य स्थल हैं जहां हनुमान मंदिर व एक बगीचा है। तात्या टोपे स्मारक इतिहास का साक्षी है।

मांडलगढ़ दुर्ग का नहीं सानी
प्राचीन मांडलगढ़ दुर्ग अब जर्जर हो चुका हैं, लेकिन गौरवशाली अतीत की यादें इसके आगोश में सिमटी हैं। बीगोद के पास त्रिवेणी संगम छोटा पुष्कर के रूप में जाना जाता है। यहां धार्मिक पर्वों पर स्नान करने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। लोग अपने पूर्वजों के अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं। शिवरात्रि पर 'सौरत का मेलाÓ भरता है। निकट ही सिंगोली श्याम का मंदिर मेवाड़ का प्रमुख तीर्थ स्थल है। मांडलगढ़ से18 किलोमीटर दूर मेनाल झरना है। यहां का महानालेश्वर मंदिर उत्कृष्ट स्थापत्य एवं मूर्तिशिल्प की खुली किताब हैं।

प्रस्तर शिल्प का बेजोड़ नमूना मंदाकिनी मंदिर
बिजौलियां क्षेत्र में मंदाकिनी मंदिर शिल्प का बेजोड़ प्रतीक है। महाकालेश्वर मंदिर, हजारेश्वर महादेव व उंडेश्वर मंदिर भी स्थापत्य कला एवं मूर्तिशिल्प की दृष्टि से आकर्षक है। निकट ही पाश्र्वनाथ भगवान की तपोभूमि है। यहंा पाश्र्वनाथ जैन मंदिर प्रमुख हैं। चामत्कारिक मंदिर के रूप में क्षेत्र के तिलस्वां नाथ महादेव की विशिष्ट पहचान है। कहते हैं कि यहां के कुंड में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। पहाड़ों के बीच शक्तिपीठ जोगणियां माता मंदिर है।

ये देश में जाने जाते है
जहाजपुर का दुर्ग खण्डहर में बदल रहा हैं, लेकिन अभी भी इसका अस्तित्व बरकरार हैं। इसी प्रकार
शाहपुरा में क्रांातिकारी बारहठ परिवार का स्मारक है। यहां के राजमहल भी भव्यता का अहसास कराता है। पीवण्या जलाशय का सौन्दर्य देखते ही बनता है। रामनिवास धाम राष्ट्रीय स्तर स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं। यहां रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक स्वामी रामचरण महाराज का स्माधिस्थल पर बारहदरी है।

धरोहर को संवारने की जरूरत
आसींद में सवाईभोज मंदिर गुर्जर समाज का प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल है। यहां राण के राजा दुर्जनशाल व बगड़ावतों के बीच युद्ध हआ था। पहाडिय़ों से जुड़े परकोटे से घिरा बदनौर दुर्ग भी एेतिहासिक है। शक्तिपीठ धनोप माता मंदिर, ऐतिहासिक बनेड़ा दुर्ग, मांडल में ऐतिहासिक मिंदारे, बत्तीस खंभों वाली जगन्नाथ कछवाहा की छतरी प्रसिद्ध है।

गंगा बाईसा महारानी की छतरी
गंगापुर में गंगा बाईसा महारानी की छतरी व नीलकंठ महादेव का मंदिर दर्शनीय हैं। हमीरगढ़ का ईको टूरिज्म पार्क प्रदेश की पहचान बनने लगा है। इनके अलावा मेजा बांध, कोटड़ी चारभुजा मंदिर, जैन तीर्थ चंवलेश्वर, गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, धोड़ का प्राचीन मंदिर, धानेश्वरम् तीर्थ, बंक्याराणी, गुलाबपुरा, लादूवास, बागोर, जगदीश उमरी एवं रायपुर भी दर्शनीय हैं।
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गेस्ट राइटर

श्यामसुन्दर जोशी, ट्रेवल राइटर तथा पूर्व संयुक्त निदेशक सूचना एवं जन संपर्क विभाग की अपनी बात....

'भीलवाड़ा जिला प्रकृति की गोद में रचा-बसा हुआ है। यहां अनेक पर्यटन स्थल और एेतिहासिक धरोहर हैं। यदि यहां आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो पर्यटन नक्शे पर उभरकर पर्यटकों का पसंदीदा केन्द्र बन सकते हैं।
यहां तक सीधी पहुंच के लिए आवागमन सुविधा बेहतर की जाए। यहां के वैभव का प्रचार प्रसार हो, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो। खासकर विश्व धरोहर मेनाल जलप्रपात पर सुरक्षा और कड़ी जाए, यहां झरने पर लोगों को नहाने से रोका जाए, अन्य पर्यटन स्थलों को और विकसित कर सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। पर्यटन स्थलों के पास से गुजरने वाले सड़क मार्ग पर संकेतक लगाकर उस स्थान का चित्र व बेसिक जानकारी प्रदर्शित करनी चाहिए। मांडलगढ़ दुर्ग, बनेड़ा, शापुरा व बदनोर महल बेमिसाल है। एेसे स्थानों पर स्कूली विद्यार्थियों की पिकनिक एवं हाइक का आयोजन किया जा सकता है। एनएसएस, स्काउट एंवं एनसीसी छात्रों के कैम्प लगाकर स्मारकों के बारे में बताया जाना चाहिए। धरोहर के रखरखाव पर पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग तथा जिला प्रशासन व स्थानीय प्रशासन के समन्वित सहयोग से सार्थक प्रयास होने चाहिए। Ó

Narendra Kumar Verma Reporting
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