
War without arms won in bhilwara
भीलवाड़ा।
ग्रीन हाउस में लगाए गए जीआई पाइप में गोलमाल में नित नए झोल सामने आ रहे हैं। स्थिति यह है कि ग्रीन हाउस का भौतिक सत्यापन बिना वर्नियर केलिपर उपकरण के कर दिया गया। इसका खुलासा उद्यान उपनिदेशक ने किया है। विभाग ने अब वे ११ फाइलें भी जांच के लिए मंगवा ली हैं, जो अनुदान स्वीकृति के लिए जिला कलक्टर के पास भेजी गई थी।
ऐसे हुआ खुलासा
राजस्थान पत्रिका में इस गोलमाल से सम्बन्धित समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि मंत्री के निर्देश पर उद्यान निदेशक मोहनलाल यादव ने उद्यान उपनिदेशक को पिछले तीन माह में बने ग्रीन हाउस का सत्यापन कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। इस पर उपनिदेशक इंद्रसिंह संचेती ने ग्रीन हाउस में लगे पाइप की मोटाई जांचने के लिए सहायक निदेशक से वर्नियर केलिपर उपकरण मांगा, तो उन्होंने नहीं होने की बात कही। उपनिदेशक ने बिना उपकरण भौतिक सत्यापनपर सवाल उठाया। संचेती ने वर्नियर केलिपर की तलाश करवाई, लेकिन जिले में कहीं नहीं मिला। अब यह उपकरण जयपुर से मंगवाया जा रहा है।
संयुक्त जांच टीम बनाने के लिए पत्र
उपनिदेशक ने निदेशक को पत्र लिखकर शिकायत करने वाले गीतादेवी खटीक व दौलतराम खटीक के ग्रीन हाउस की जांच के लिए निदेशालय स्तर पर संयुक्त जांच दल गठित करने व अनुदान का भुगतान करने की सिफारिश की है। उधर, कृषि विभाग भीलवाड़ा के संयुक्त निदेशक रामगोपाल नायक ने भी इस जांच के लिए सहायक कृषि अभियन्ता को लगाने के आदेश दिए हैं। बिल वर्गमीटर के आधार पर बनाने तथा भुगतान कम्पनी को करने के मामले में संचेती ने बताया कि बिल का प्रारूप निदेशालय से निर्धारित है। निदेशालय के निर्देश पर अनुदान का भुगतान किसान की सहमति से कम्पनी को किया जाता है। होड़ा के किसान भैरूलाल गुर्जर ने ग्रीन हाउस के लिए आवेदन किया। प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के तकनीकी कारणों से गुर्जर के ग्रीन हाउस तक नहीं लगाया।
क्या संतुष्टि प्रमाण पत्र
भौतिक सत्यापन के दौरान किसान से एक प्रारूप के आधार पर संतुष्टि प्रमाण पत्र लिया जाता है। इस प्रारूप में ग्रीन हाउस सही लगा या नहीं। निर्धारित साइज में है या नहीं। ड्रिप सिस्टम काम कर रहा या नहीं। कम्पनी की ओर से निर्माण पूरा होने के बाद किसान से लेन-देन बाकी तो नहीं है। इसके लिए उससे हस्ताक्षर करवाए जाते हैं। इसे ही आधार मानकर गोलमाल हो रहा है। मौके पर इन मानदंडों को नहीं देखा जा रहा है। अधिकारी के पास डायामीटर तक नहीं है। इसके बाद भी भौतिक सत्यापन को सही मानकर कम्पनी को भुगतान कर दिया जाता है।
जयपुर से मंगवाया केलिपर
जांच के लिए उद्यान विभाग के पास उपकरण नहीं है। अब जयपुर से मंगवाया गया है। इसके आधार पर जांच करेंगे। इससे किसान सन्तुष्ट नहीं होता है तो कुछ पाइप खुलवाकर वजन करवाया जाएगा।
इन्द्रसिंह संचेती, उप निदेशक उद्यान, भीलवाड़ा
Published on:
09 Mar 2019 12:07 pm
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