पीना तो दूर नहाने और कपड़े धोने में भी हैंडपंप के पानी का उपयोग नहीं किया जा सकता। मात्र एक कुआं है वह भी सूख चुका है। इस कुएं के पैंदे में थोड़ा-थोड़ा पानी इकट्ठा होता है और उसे ही महिलाएं भरकर ले जाती हैं। कुछ मटकियां भरने के बाद जब कुएं में पानी खतम हो जाता है तो महिलाएं खाली मटकियां लेकर वापस घर चली जाती हैं, और कुएं में पानी इकट्ठा होने का इंतजार करती है। यह क्रम सुबह 4 बजे शुरू होता है जो दिनभर चलता है। जैसे-जैसे कुएं में थोड़ा-थोड़ा पानी इकट्ठा होता है, महिलाएं पानी निकालती है। कुछ लोग टेंकर मंगवाकर प्यास बुझाने को विवश हैं।