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बिरड़ा ने मनरेगा में क्या कमाल किया, जानिए

कोरोना संकट से जुझ रहे भीलवाड़ा जिले ने प्रदेश में मनरेगा में सर्वाधिक सवा चार लाख व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मुहैय्या कराते हुए श्रेष्ठ कार्यशैली की मिसाल पेश की। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाल राम बिरड़ा ने जिले को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए घंटों अपने टीम के साथ कार्य किया।

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What did Birada do in MNREGA, know

What did Birada do in MNREGA, know

बिरड़ा ने मनरेगा में एेसा क्या कमाल किया, जानिए

भीलवाड़ा। कोरोना संकट से जुझ रहे भीलवाड़ा जिले ने कभी हारी नहीं मानी और विभिन्न मोर्चो पर जीत हांसिल की, देश में भीलवाड़ा मॉडल बन कर उभरा और प्रदेश में मनरेगा में सर्वाधिक सवा चार लाख व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मुहैय्या कराते हुए श्रेष्ठ कार्यशैली की मिसाल पेश की। प्रवासियों को मनरेगा से जोड़ा और स्थानीय लोगों के सामने आए रोजी रोटी के संकट को दूर करने की बड़ी कोशिश की। इस श्रेष्ठता के लिए जिला प्रशासन के साथ ही जिला परिषद की भूमिका भी अहम् रही। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाल राम बिरड़ा ने जिले को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए घंटों अपने टीम के साथ कार्य किया। गांवों के हालात जाने और स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचे भी है। उनसे जाना मनरेगा व कोरोना से निपटने का मूलमंत्र।

सवाल: प्रदेश में मनरेगा में सर्वाधिक रोजगार दिए, क्या रणनीति रही
जवाब: कोरोना से गांवों में रोजगार के अवसर घट गए और आर्थिक स्थिति पर विपरीत असर पड़ा। ऐसे में जंगल,जल व जमीन के कामों को हमने हाथ में लिया। तालाब, नहर के सुदृढ़ीकरण, चारागाहों का विकास, जंगल को हरा भरा करने पर कार्य करने की नीति बनाई। इसके लिए विकास अधिकारी, तकनीकी अधिकारी, अभियंता, ग्राम सेवक, लिपिक को हमनें प्रोत्साहित किया और विस्तृत कार्ययोजना बनाते हुए सभी जगह कार्य मंजूर किए और यहां काम शुरू कराया।

सवाल: मनरेगा से कैसे जोड़ा
जवाब: एक गांव चार काम योजना की नीति से काम किया। इसके तहत प्रत्येक गांव में एक चारागाह, खेल मैदान, शमशान घाट व मॉडल तालाब बनाने पर काम शुरू किया और विकास की राह खुली। जिले मेंं १९०० से अधिक गांव है, प्रत्येक गांव में कार्य मंजूर किया ताकि उन्हें तीन किलोमीटर के दायरे में ही काम मिल सके। इससे गांवों में खेल मैदान बने है, नहरें व बांधों की स्थिति मजबूत हुई है गांवों की स्थिति बदली है, यहां नालियों

सवाल: श्रम घंटे व वेतन किस प्रकार तय है
जवाब: कार्य दिवस छह सुबह छह बजे से दोपहर एक बजे तक रहता है, कार्य जल्द पूरा करने पर वो ११ बजे तक भी जा सकता है। कार्य क्षमता के आधार पर २२० रुपए तय है, जिले में अभी औसत दैनिक राशि दो सौ रुपए है। एक श्रमिक को १०० दिन के रोजगार की गारंटी रहती है, प्रत्येक गुरुवार को अवकाश रहता है।

सवाल: सुविधाएं नहीं देने की शिकायतें रहती है
जवाब: ये शिकायतें निराधार है, प्रत्येक कार्यस्थल पर धूप छांव व पानी की व्यवस्था है, इस बार साबुन की सुविधा भी दी है। सीएमएचओ की मदद से दवा किट भी बांटे है।

सवाल: मनरेगा ने कैसे बदली जिन्दगी
जवाब: मनरेगा ने गांवों में जिन्दगी बदल दी, खास कर महिलाओं की जीवन शैली प्रभावित हुई, महिलाओं के सामने पहले आर्थिक तंगी की स्थिति थी, खुद व बच्चों के लिए अच्छे कपड़े, दैनिक वस्तु नहीं खरीद पाती थी, लेकिन मनेगा ने उनकी आर्थिक स्थिति को मंजूरी दी है। समाज व पारिवारिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका मजबूत की है और उन्हें अब किसी बड़े घर या व्यक्ति के सामने रोजगार मांगने नहीं जाना पड़ता है।

सवाल: महिलाओं को कितना फीसदी रोजगार दे रहे है
जवाब: जिले में करीब तीन लाख महिलाएं मनरेगा से जुड़ी हुई है जो कि मनरेगा में श्रमिकों की संख्या का ७० फीसदी से अधिक है।

सवाल: मनरेगा काम पर क्यूं उठते है सवाल
जवाब: शिकायतों के निवारण के लिए हमनें ५० फीसदी महिला मेट नियुक्त की है,इसमें भी बीपीएल, परितक्यता व विधवा को प्राथमिकता दी है। एक पखवाड़े बाद हम मेट बदल देते है,इससे शिकायतों पर अंकुश लगी है

सवाल: शिकायतों पर किस प्रकार हुई कार्रवाईर्
जवाब: प्रत्येक पंचायत क्षेत्र से मेट के खिलाफ शिकायतें मिली है और मिलती रहती है। जांच को लेकर गंभीरता बरती जाती है। लोकपाल या संबधित जांच करते है। अभी तक जिले में एक साल में दर्जनों मेट को हटाया जा चुका है, ग्राम सेवक निलम्बित हुए है, सरपंचों व वार्ड पंच के खिलाफ गबन व अनियमितता की जांच बैठी है। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्यवाही हुई है।

सवाल: कितने नए जॉब कार्ड बनें
जवाब: प्रत्येक परिवार का जॉब कार्ड होता है, जो काम मांगता है उसे पन्द्रह दिन में काम देते है उसे देते है, प्रवासियों के आने से इस साल दो लाख नए जॉब कार्ड बनें है, इनमें २४ हजार प्रवासी लोग भी शामिल है

सवाल: ग्रामीण भी जुड़े है क्या
जवाब: जिले में कोरोना से बढ़ी आर्थिक तंगी से अभी छोटे दुकानदार है वो भी काम मांग रहे है, उन्हें काम दिया जा रहा है, वो दोपहर एक बजे तक वो मनरेगा में काम करते है फिर दुकान संभालते है, इससे उन्हें आर्थिक संबल मिल रहा है।

सवाल: कोरोना में कैसे की मदद
जवाब: कोरोना काल के दौरान जब गांवों में घर बंद थे तो व्यापक स्तर पर जरुरत मंद लोगों की मदद की, विधायक कोष के जरिए हमें कुल आठ करोड़ रुपए मिले, इससे गांवों में नि:शुल्क खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की। सरंपच व एलडीएस की मदद से गेहूं एकत्रित कर जरुरतमंदों की मदद की,

सवाल: प्रवासियों को रोजगार के कितने अवसर मिलें
जवाब:गांवों में प्रवासियों के क्वारेटीन केन्द्रों की व्यवस्था संभाली यहां उनके भोजन पानी के साथ ही जरूरत का सामान मुहैय्या कराया। क्वांरटीन की अवधि पूर्ण करने के बाद २४ हजार प्रवासियों को मनरेगा में रोजगार दिलवाया है।

सवाल: जिला परिषद की अन्य बड़ी योजनाओं की क्या स्थिति है
जवाब: प्रधानमंत्री आवास योजना पर बड़ा काम हो रहा है, चार साल में ५० हजार से अधिक घर बना कर दिए गए है, इसमें डेढ़ लाख रुपए सरकार की तरफ से देय है। मनरेगा के तहत ९० दिन का मस्टरोल उक्त व्यक्ति को निर्माण कार्य स्थल पर करने के लिए दिया जाता है, शौचालय निर्माण का पैसा भी सरकार देती है। इस साल प्रत्येक गांव में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण हो रहा है। स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत भी प्रत्येक गांव में काम हो रहा है।