
भीलवाड़ा : गेहूं का रकबा घटा, जौ की बुवाई पर जोर
भीलवाड़ा जिले में बीते सात-आठ वर्ष में गेहूं का रकबा काफी घट गया है। वर्ष 2015-16 में एक लाख 9 हजार 964 हैक्टेयर में गेहूं बोया। वर्ष 2019-20 में सर्वाधिक एक लाख 25 हजार हैक्टेयर रकबा था। तब 4 लाख 87 हजार 522 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ। वर्ष 2023-24 में रकबा घटकर महज 81,658 हैक्टेयर रह गया। इधर, किसानों का इस बार गेहूं के बजाय जौ पर जोर ज्यादा है। इसे नकदी फसल माना जाता है। जिले में इस बार 35,728 हैक्टेयर में जौ की बुवाई की गई है।
यहां बताते चले कि वर्तमान में खुदरा बाजार में गेहूं का आटा 32 रुपए से 40 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। खुदरा बाजार में मशीन क्लीन गेहूं 3000 रुपए प्रति क्विंटल तो सॉर्टेक्स गेहूं के भाव 3200 रुपए प्रति क्विंटल पार कर गए। बढ़ते भाव व आगामी स्थिति तो देखें तो नई फसल आने तक गेहूं के भाव नीचे आने के आसार कम है।
समर्थन मूल्य 2275 रुपए प्रति क्विंटल
केंद्रीय कैबिनेट ने 2024-25 में गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपए प्रति क्विंटल मंजूर किया। वर्ष 2023-24 में यह 2125 रुपए था। बीते साल गेहूं की फसल पर असर पड़ा।सरकार 187.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद पाई। यह 15 साल में सबसे कम सरकारी खरीद थी। वर्ष 2023 में कई प्रदेशों में चुनाव हुए। वर्ष 2024 भी चुनावी साल है। लेकिन इसके बीच गेहूं के घटते सरकारी स्टॉक ने चिंता बढ़ा दी।
गत वर्ष भी नहीं भरे थे सरकारी भंडार
वर्ष 2022-23 में गेहूं का समर्थन मूल्य 2125 रुपए प्रति क्विंटल था। खुले बाजार में अच्छी कीमत मिलने के चलते सरकारी कांटों पर नाममात्र की खरीद हो पाई जो लक्ष्य के विपरीत 25 प्रतिशत भी नहीं रही। जिले में एफसीआई की ओर से विभिन्न सरकारी योजना के तहत आवंटित गेहूं के वितरण की पूर्ति के लिए अन्य राज्यों से गेहूं मंगवाया जा रहा है।
Published on:
11 Jan 2024 11:20 am
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