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पत्रिका वुमन्स वीक : नारियों संभलो संभालों वक्त की पतवार को, है समय एेसा उठा लो हाथ में तलवार को…

विश्व भर में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जहां उन्हें कोई प्रताडि़त नहीं करेगा

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर राजस्थान पत्रिका की ओर से वुमन्स वीक मनाया जाएगा। इस कड़ी में सबसे पहले बसंत विहार में टॉक शो आयोजित किया गया।

भीलवाड़ा।

आठ मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। हर जगह महिलाओं के सम्मान का पाठ पढ़ाया जाता है। इतना होने के बावजूद समाज में महिलाओं के प्रति सोच नहीं बदल रही है। यह दिन महिलाओं को उनकी क्षमता, सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तरक्की दिलाने व उन महिलाओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। भारत में आज महिला आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्र में पुरूषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। माता-पिता अब बेटे-बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं।

लेकिन यह सोच समाज के कुछ ही वर्ग तक सीमित है। सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा, जब विश्व भर में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जहां उन्हें कोई प्रताडि़त नहीं करेगा, जहां उन्हें दहेज के लालच में जिंदा नहीं जलाया जाएगा, जहां कन्या भ्रूण हत्या नहीं की जाएगी। वर्तमान में महिलाओं के समक्ष समाज में कई चुनौतियां है।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर राजस्थान पत्रिका की ओर से वुमन्स वीक मनाया जाएगा। इस कड़ी में सबसे पहले बसंत विहार में टॉक शो आयोजित किया गया। अब पूरे सप्ताह प्रतिदिन गतिविधियां होगी। इसमें शहर के कई संगठन और संस्थाओं से सहयोग लिया जाएगा। इस दौरान गतिविधियों से अहम मुद्दों पर मंथन होगा, जो समाज व शहर के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होगा।

महिलाओं के लिए समर्पित रहेगा वीक
राजस्थान पत्रिका की ओर से महिला दिवस के मौके पर वुमन्स वीक मनाया जाएगा। इसके तहत महिलाओं से जुड़े हर पहलु पर गतिविधि आयोजित की जाएगी। पहले दिन समाज में महिलाओं के समक्ष चुनौतियों पर चर्चा की गई। शहर के विभिन्न संगठनों व संस्थाओं के सहयोग से वुमन्स वीक मनाया जाएगा। इसके तहत समाज में आदर्श महिलाएं उन महिलाओं के बीच जाएंगी तो कुछ करना चाहती है। साथ ही खाना-खजाना, हेल्थ टिप्स व ब्यूटी टिप्स दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि गुुरुवार को (आठ मार्च ) को दुनिया भर में महिला दिवस मनाया जाएगा।

टॉक शो में ये महिलाएं रही मौजूद
हैप्पी क्लब बापू नगर से नीलू बागरानी, रेखा गुर्जर, इंद्रा सोनी, रचना देवड़ा, नंदनी राठौड़, सारिका सेठ, सुधा सोनी, विजया चौधरी, रानू सेन, बसंत विहार गांधी नगर महिला मंडल से मंजू न्याती, शोभा राठी, मोनिका लड्ढा, सुनिता लड्ढा, कृष्णा अग्रवाल, लीला राठी, रीना अजमेरा, नीलकमल गगरानी, श्रीआदिनाथ महिला मंडल कांचीपुरम से गुणमाला बोहरा, मधु सांखला, स्नेहलता बोहरा, शकुंतला सकलेचा, नीतू सकलेचा, अनिला सुराणा, ज्योति संचेती, पिंकी सिसोदिया, उदिता भंडारी, सुमन हिंगड़ व सरोज कोगटा सहित कई महिलाएं मौजूद थी।


सुरक्षा समेत अहम मुद्दों पर रखी राय

पुरूषों का दृष्टिकोण अगर सही है तो महिलाओं को घूंघट निकालने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। समाज में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और अपराध जिस दिन कम हो जाएंगे, तभी सही मायने में महिला दिवस मनाना सार्थक होगा।
इंद्रा सोनी
कॉलोनियों में आवारा तत्वों के घूमते रहने से बेटियों को खिड़की से झांकना तक मुश्किल हो गया है। एेसे में उन्हें घर पर एकेली छोड़ के जाना खतरे से खाली नहीं है। बेटियों को कोचिंग भेजने में भी अब डर लगने लगा है। जब तक वह घर नहीं आ जाती तब तक जी मु_ी का मु_ी में ही रहता है।
गुणमाला बोहरा
महिलाआें को अधिकार तो दे दिए लेकिन कानूनन सुरक्षा मुहैया नहीं होने से अपराधिक प्रवृतियों के लोगों के हौंसले बुलंद है। आज महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारिवारिक स्पोट के साथ-साथ समाज का साथ भी जरूरी है।
सुनीता लड्ढा
महिलाओं में बहुत शक्ति है, अगर वह चाहे तो हर क्षेत्र में पुरूषों को मात दे सकती है। महिलाएं अब चांद-तारों तक पंहुच गई है, तो अब भी समाज यह क्यों नहीं समझता कि उसका साथ देकर उसे और आगे बढ़ाया जाए।
शोभा राठी
महिला घर से बाहर कदम रखती है तो टोका जाता है। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरूषों से कम नहीं है। महिलाओं को जागरूक होकर एकजुट होने की आवश्यकता है। ताकि सबको लगे, नारी अबला नहीं बल्कि सबला है।
स्नेहलता बोहरा
आज के दौर में घर के बाहर पानी पताशा बेेचने व फेरी लगाने वालों पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। सरकार को महिलाओं की सुरक्षा पर विचार करना चाहिए। महिला दिवस को एक दिन ही नहीं मनाया जाकर सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा के लिए लागू करना चाहिए।
अनिला सुराणा
घर से बाहर स्कूल व कॉलेज में बेटियों के साथ छेड़खानी या कोई घटना घट रही है तो, उन्हें अपने माता-पिता या अभिभावकों को खुलकर बताना चाहिए। ताकि समय रहते उनकी सहायता कर बचाया जा सकें।
नीलू वागरानी
महिलाओं को सतर्क व सुरक्षित रहने की जरूरत है। किसी घटना के वक्त घबराना नहीं चाहिए, बल्कि आत्म विश्वास के साथ हिम्मत से काम ले मुकाबला करना चाहिए। एेसे वक्त में एक को दूसरी महिला का साथ देना चाहिए।
विजया चौधरी

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