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राजस्थान में बनी दुनिया की सबसे बड़ी रोटी, वजन-185 किलो, जानें खास बातें

टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में रविवार को दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनाने का दावा किया गया। 130 किलो आटा और दस किलो मैदे से 185 किलो वजनी रोटी तैयार हुई। रोटी विशेष भट्टी में सेकी गई, जिसमें करीब पांच घंटे लगे।

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भीलवाड़ा। टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में रविवार को दुनिया की सबसे बड़ी रोटी बनाने का दावा किया गया। 130 किलो आटा और दस किलो मैदे से 185 किलो वजनी रोटी तैयार हुई। रोटी विशेष भट्टी में सेकी गई, जिसमें करीब पांच घंटे लगे। इसे गिनीज और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया की जाएगी।

शहर के हरिशेवा धाम में सुबह सवा ग्यारह बजे घी और कपूर से अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। 130 किलो आटा व 10 किलो मैदा गूथा गया। बीस फीट के स्टील के बेलन से पांच जनों ने रोटी बेली। दो हजार ईंटों से तैयार भट्टी में एक हजार किलो कोयले पर रोटी सेकी गई। शाम पौने पांच बजे रोटी तैयार हुई। उसके बाद वजन किया तो रोटी 185 किलो निकली। रोटी तैयार करने में 15 किलो घी, 10 किलो तेल और पचास किलो पानी लगा।

विभिन्न राज्यों के 21 हलवाई रोटी बनाने की प्रक्रिया से जुटे। रोटी के टुकड़े कर पंचकूटा की सब्जी के साथ प्रसाद के रूप में आमजन को बांटा। राजस्थान जनमंच के अध्यक्ष कैलाश सोनी ने बताया कि इस रिकॉर्ड को लिम्का बुक और गिनीज बुक में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसकी लाइव रिकॉर्डिंग हुई और सोशल मीडिया पर चलाया गया।

6 तवे जोड़कर बनाई भट्टी
भट्टी छह तवों को जोड़कर बनाई गई। आटा गूंथने के बाद उसे भट्टी पर रखा गया। रोटी बेलने के लिए 11 जनों को लगाया गया। इन्होंने पैरों में एप्रीन पहन रखी थी। इससे तवे पर चढ़कर रोटी बेलते समय मिटटी उसमें नहीं जा सके। इनके सिर पर टोपी पहनाई गई। जिससे बाल रोटी पर नहीं गिरें। रोटी बेलने में करीब एक घंटा लगा। उसके बाद भट्टी को आंच दी गई।

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किनारे पर डाला घी और तेल, आंच तेज और मंद करते गए
रोटी ज्यों-ज्यों सिकती जा रही थी। उसके किनारे पर घी और तेल डाला जा रहा था। ताकी रोटी ना जले ना ही तवे पर चिपके। आंच को तेज और मंद किया जा रहा था। जिस तवे पर आंच तेज थी, वहां पानी डालकर कम किया जा रहा था। करीब बारह बजे बाद रोटी सिकना शुरू हुई। शाम पौने पांच बजे तक रोटी सिकी।

पलटना सम्भव नहीं, इसलिए फॉइल पेपर लगाकर कंडे से सिकाई
रोटी का एक हिस्सा तवे पर नीचे सिक चुका था। इतनी बड़ी रोटी के दूसरे हिस्से को पलटकर सेकना सम्भव नहीं था। ऐसे में ऊपजी हिस्से में रोटी पर फॉइल पेपर लगाया गया। उसके बाद लोहे की शीट रखकर जले कंडे (सूखे गोबर के टुकड़े ) शीट पर रखकर रोटी के ऊपर हिस्से में घूमाकर उसकी सिकाई की गई। उसके बाद रोटी तैयार हुई। रोटी पर घी लगाया गया। बाद में टुकड़े करके उसका वजन किया गया। ठाकुर जी को भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया।