
दोनों भाइयों की फोटो: पत्रिका
Younger Brother Donate Bone Marrow: थैलसीमिया मुक्त भारत अभियान की दिशा में भीलवाड़ा जिले से एक उम्मीद भरी और सुखद खबर सामने आई है। गुरलां के पास जागदरी गांव के 13 साल के रौनक प्रजापत को अब हर महीने खून चढ़वाने के दर्दनाक दौर से मुक्ति मिल गई है। अपने छोटे भाई नवीन के बोनमेरो दान और चिकित्सा टीम की अनवरत मेहनत से रौनक पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आया है। यह सफलता परिवार के लिए नई उम्मीद और समाज के लिए प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।
रौनक की माता विमला देवी और पिता सांवरमल प्रजापत जो की अहमदाबाद में ढाबा संचालक है। उन्होंने बताया कि बेटे की इस बीमारी के इलाज में भीलवाड़ा के रक्तवीर विक्रम दाधीच संकटमोचक बनकर उभरे। शहर के एक निजी अस्पताल में आयोजित एचएलए टेस्ट शिविर के दौरान रौनक का एचएलए उसके 8 साल के छोटे भाई नवीन से मैच हो गया। इसके बाद महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर तथा साउथ ईस्ट एशिया इंस्टीट्यूट फॉर थैलसीमिया के सहयोग से इलाज का मार्ग प्रशस्त हुआ।
जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में डॉ. प्रिया मारवाह और उनकी मेडिकल टीम की देखरेख में रौनक को 6 दिसंबर 2025 को भर्ती कराया गया। 31 दिसंबर 2025 को सफल बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद उसे 6 महीने तक अस्पताल में क्वारंटीन रखा गया। इसके बाद 1 जुलाई 2026 को उसे घर के लिए डिस्चार्ज कर दिया गया। फिलहाल डॉक्टर्स ने उसे अगले 6 महीने तक घर पर ही क्वारंटीन रहने की सलाह दी है। यह पूरा इलाज सरकारी संस्थाओं और आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क संपन्न हुआ।
सफल ट्रांसप्लांट के बाद रौनक के गांव पहुंचने पर खुशियों का माहौल बन गया। पेंच के बालाजी मंदिर के महंत आशुतोष शर्मा, समर्पण फाउंडेशन के आलोक जाजू, अर्पित दाधीच, अरुण यादव और संदीप मेहता ने गांव पहुंचकर रौनक का अभिनंदन किया और उसके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
रक्तवीर विक्रम दाधीच ने बताया कि भीलवाड़ा एचएलए शिविर के जरिए अब तक 7 बच्चों को बोनमेरो दान मिल चुका है, जिससे उनके परिवारों में फिर से खुशियां लौट आई हैं। अंगदान दिवस के अवसर पर बोनमेरो दान करने वाले इन सभी वीरों का विशेष सम्मान किया जाएगा।
Updated on:
25 Jul 2026 09:18 am
Published on:
25 Jul 2026 09:18 am
