
कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते रसाल सिंह
भिण्ड. कयास लगाए जा रहे हैं कि रसाल सिंह बसपा से चुनाव मैदान में आ सकते हैं। पिछले चुनाव में अंबरीश शर्मा भी रसाल सिंह के खिलाफ भाजपा से बगावत कर बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं। रसाल सिंह ने कहा कि सीएम शिवराज सिंह, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं पूर्व सीएम उमा भारती ने उनके नाम पर सहमति दी थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी बात सुनी ही नहीं। पैसे से चुनाव नहीं जीत सकता
भाटन ताल के पास एक मैरिज गार्डन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में पूर्व विधायक रसाल सिंह ने कहा कि पैसे से टिकट तो कोई भी ला सकता है, लेकिन पैसे की दम पर चुनाव नहीं जीता जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, लेकिन इस चुनाव में नहीं दिखी। इस बार जिले, मंडल को भी नजर अंदाज किया गया। यह तो सरासर तानाशाही है। तानाशाही से पार्टी नहीं चल पाती, आपक चलाने की कोशिश कर रहे हैं तो पार्टी टूट जाएगी। इसे ठीक करो, आपने टिकट दिया है तो बदल भी सकते हो। उन्होने कहा कि हम 10 साल से काम कर रहे, कार्यकर्ताओं के सुख-दु:ख में हम साथ रहे हैं। उनकी यहां कोई सुनने वाला नहीं है। चुनाव लड़ रहे हैं वे भाजपा के कार्यकर्ताओं को पहचानते तक नहीं। पार्टी अपने निर्णय पर विचार नहीं करती है तो हम अपने निर्णय पर विचार करेंगे। कार्यकर्ताओं ने यह अधिकार हमें दिया है।
खून देकर भी यदि पसीने की कीमत न मिले...
सीधे तौर पर तो रसाल सिंह ने पार्टी से बगावत का ऐलान नहीं किया है। लेकिन एक शेर के माध्यम से सारी बात कह दी। रसाल सिंह ने कहा ‘खून देकर भी जो पसीने की कीमत न मिले, ये आसार तो बगावत के हुआ करते हैं।’ इसके बाद माना जा रहा है कि रसाल सिंह पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ेंगे।
सिंधिया की प्रतिष्ठा लगी थी दांव पर
रसाल सिंह ने कहा कि लहार के टिकट को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी नेतृत्व से कहा था कि यहां हमारी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, इसलिए हमारी लाज बचाइए और टिकट रसाल सिंह को दीजिए, लेकिन उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया। हमारा नाम सब जगह था, इसिलए किसी नेता के पास भी नहीं गए, लेकिन बड़े नेताओं की अनुशंसा और सर्वे को नकार कर टिकट दिया गया। ऐसे हालात से पार्टी का भला नहीं होने वाला।
खून देकर भी यदि पसीने की कीमत न मिले...
सीधे तौर पर तो रसाल सिंह ने पार्टी से बगावत का ऐलान नहीं किया है। लेकिन एक शेर के माध्यम से सारी बात कह दी। रसाल सिंह ने कहा ‘खून देकर भी जो पसीने की कीमत न मिले, ये आसार तो बगावत के हुआ करते हैं।’ इसके बाद माना जा रहा है कि रसाल सिंह पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ेंगे।
Published on:
02 Oct 2023 02:29 pm
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