
विष्णु तोमर
भिण्ड। सर्दियों के आगमन के साथ ही चंबल में घड़ियालों की नई पीढ़ी के आगमन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नर और मादा घडियाल नदी में यौन क्रियाएं कर रहे हैं। हालांकि बाढ़ से इनके व्यवहार में परिर्वन आया है। गौरतलब है कि विश्व में घड़ियालों की लुप्त होती प्रजाति है, लेकिन विश्व में सबसे ज्यादा घड़ियाल मध्यप्रदेश के चंबल नदी में पाए जाते हैं।
क्रोकोडाइल प्रेमी जिगर उपाघ्याय ने घड़ियालों के इस यौन व्यवहार को कोर्टशिप व्यवहार की संभावना व्यक्त करते हुए बताया कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण निरीक्षण है, जिसमें बहुत संभावना है कि घड़ियाल भविष्य में अपना जोडा तय करने के लिए कोर्टशिप व्यवहार कर रहे हों। डॉ मनोज जैन ने अपनी वीडियो रिकार्डिग में नर घड़ियाल को उसके घडे़ नुमा थूथन से यौन व्यवहार की आवाज निकालते हुए मेटिंग रिकार्ड किया है, जो कि घड़ियालों के जोड़े सर्दियों में ही यौन की क्रियाएं करते हैं।
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हैचरी में मुरैना भेजे जाएंगे अंडे
घड़ियालों के अंडों को सुरक्षित रखने के लिए चंबल नदी से घड़ियालों के अंडे एकत्रित कर कृत्रिम रूप से हैचरी के लिए मुरैना स्थित देवरी के इको सेंटर पर भेजे जाएंगे। यहां से हेचिरंग के बाद नन्हे घड़ियालों को चंबल नदी के अलावा मुरैना, श्योपुर सहित देश के कई हिस्सों में भेजा जाता है। यही वजह है कि आज चंबल में पल रहे घड़ियाल देशभर में नदियों, जू और सेंक्चुरियों की शान बने हुए हैं।
कितने घड़ियाल हैं चंबल में
चंबल नदी में वर्ष 2019 में 1876 घड़ियाल थे। 2020 में चंबल नदी के 435 किमी दायरे में की गई गिनती में घड़ियालों की संख्या मात्र 1859 रह गई थी। लेकिन 2021 में हुई गिनती में चंबल में एक साल में 317 घड़ियाल बढ़े थे, जिससे इनकी संख्या 2176 हो गई थी। अब इस संख्या में और इजाफा होगा
घड़ियालों के लिए चंबल मुफीद
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के दिसम्बर 2017 के सर्वे के अनुसार संसार की अत्याधिक संकटग्रस्त प्रजातियों में शुमार घडियालों के संरक्षण के लिए चंबल नदी को सबसे मुफीद माना गया है। 1972 में घड़ियाल को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल वन के तहत संरक्षित किया गया है। घड़ियाल वर्ष में एक बार सर्दियों में प्रजनन करते हैं और मार्च से मई के बीच अंडा देते हैं। 60 से 80 दिनों तक अंडों को सेने के बाद 35 से 60 बच्चे जन्म लेंगे। मंगलवार को शहडोल के आयुक्त राजीव शर्मा के साथ चंबल के वन्यजीवन पर सतत निगरानी रखने वाले वन्यजीव एक्टिविस्ट डॉ मनोज जैन ने नदी में घड़ियालों का यौन व्यवहार का अवलोकन दिया। जिसे इतना नजदीक से देखकर सभी रोमांचित हो गए।
बाढ़ से बदल गए ठिकाने
विगत दो वर्षो से चंबल में आ रही बाढ़ से घड़ियालों के आशियाने और ठिकाने बदल गए हैं। उम्मीद की जा रही है कि अब जब चंबल में पानी कम होने लगा है तो घड़ियाल वापस अपने पुराने पसंदीदा स्थलों पर वापस आ जाएंगे। इन दिनों चंबल नदी में घड़ियालों के यौन व्यवहार को नजदीक से देखा जा सकता है। घडियालों के व्यवहार में आए इस परिवर्तन के बारे में घड़ियाल विशेषज्ञ डॉ ऋषिकेष शर्मा ने भी इस व्यवहार को नया और विशिष्ट परिवर्तन बताते हुए कहा कि भारी बाढ़ से स्थान परिवर्तन हो जाने से घड़ियालों के यौन व्यवहार में इस परिर्वतन की संभावना है। सर्दियां आने पर चंबल नदी में पानी कम होने पर घड़ियाल अपने पुराने ठिकानों पर जब आएंगे तब पुन: संभव है कि वह अपना नैर्सगिक यौन व्यवहार करने लगें।
चंबल किनारे रेत में घौंसले बनाकर मादा घड़ियाल नेस्टिंग करते हैं। सभी अंडों को सुरक्षित इको सेंटर में रखा जाएगा।
स्वेता त्रिपाठी, प्रभारी चंबल सेंक्चुरी भिण्ड
Updated on:
30 Nov 2022 05:04 pm
Published on:
30 Nov 2022 05:02 pm
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