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मिट्टी हेल्थकार्ड बने नहीं कैसे होगी जांच

30 हजार मिट्टी हेल्थकार्ड बने ही नहीं, सैंपल लेने से लेकर विश्लेषण तक में भारी सुस्ती, घट रहा है उत्पादन, मैन पॉवर की कमी भी बन रही है बाधक, सिर्फ तीन

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भिंड

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monu sahu

Jan 16, 2018

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भिण्ड. पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को जिले में कितने हल्के से लिया जा रहा है इसकी बानगी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में देखने को मिल रही है। सैंपल लेने से लेकर मिट्टी हेल्थकार्ड बनाने में उदासीनता के चलते 30 हजार से अधिक कार्ड अभी तक बन ही नही पाए हैं। अधिकारियों को 31 मार्च 2018 तक उक्त कार्डबनाकर किसानों तक पहुंचाने का टारगेट दिया गया था। कम समय और काडऱ्ो की संख्या अधिक होने के कारण किसानों को इस बार भी लाभ मिलने की संभावना नहीं हैं।

खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए पीएम ने सभी किसानों को मुफ्त में मिट्टी हेल्थकार्ड बनाकर देने की योजना दो साल पहले लागू की थी। द्वितीय चरण में वर्ष 2017-18 और 2018-19 में 16227 सैंपल्स का विश्लेषण कर 51622 मिट्टी हेल्थकार्ड बनाकर किसानों तक भेजने का टारगेट दिया गया था। 15 जनवरी 2018 तक सिर्फ 8967 सैंपल्स का विश्लेषण कर 21 हजार कार्ड बनाकर किसानों तक पहुंंचाने का दावा किया जा रहा है। अधिकारी खुद ही ये स्वीकार कर रहे हैं कि टारगेट के विरूद्ध लिए गए १०४८४ सैंपल्स में से 1517 का अभी तक विश्लेषण ही नहीं हो पाया है। सैंपल्स का विश्लेषण न हो पाने के कारण ३०६२२ मिट्टी हेल्थकार्ड अभी तक बने ही नहीं हैं, जबकि 31 मार्च तक टारगेट के अनुसार सभी हेल्थकार्ड बनाकर किसानों तक पहुंचाना है। कार्ड पहुंचाने की समय-सीमा समाप्त होने में अब लगभग दो सप्ताह का ही समय शेष है। इतने कम समय में इतने अधिक कार्डकिसानों तक पहुंचाना संभव नहीं लग रहा है। जब तक कार्ड बनकर तैयार होंगे तब तक किसान खरीफ की बौनी भी कर चुके होंगे। काम की धीमी गति के पीछे अधिकारी मैन पॉवर की की कमी का रोना रो रहें हैं।

कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही भी आई सामने

परीक्षण के लिए मिट्टी के नमूने विश्लेषण के लिए लाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग के एसएडीओ को सौंपी है। 10 माह का समय गुजर जाने के बाद भी कर्मचारी लक्ष्य के विरूद्ध अभी तक सैंपल नहीं ला पाए हंै। इस संबंध में डीडीओ को भी शिकायत की गई है लेकिन लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। कार्ड बनने की धीमी गति के पीछे यह भी एक कारण माना जा रहा है। सिंचित जमीन होने पर ढाई हेक्टेयर के बीच से तथा असिंचित होने पर 10 हेक्टेयर के बीच से एक संैपल लेने का प्रावधान किया है। तकनीकि पहलू होने के कारण जरा सी असावधानी करने पर विश्लेषण की रिपोर्ट भी प्रभावित हो सकती है।

&सैंपल्स समय पर नहीं मिल रहें। इस संबंध में डीडीओ को भी बता चुके हंैं। मार्च तक टारगेट पूरा कर पाना संभव नहीं है। कार्ड बनाने में तेजी लाने के लिए कुछ लड़कों को रखा गया है। मैन पॉवर की कमी भी हमारी बड़ी समस्या है।

रामबलवान जाटव सहा.जिला मिट्टी परीक्षण अधिकारी