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पुलवामा मुठभेड़ में 3 आतंकियों को उतारा था मौत के घाट, अब राष्ट्रपति करेंगे जवान को सम्मानित

जवान कुलदीप सिंह भदौरिया ने बड़ी ही बहादुरी के साथ 9 महीने पहले पुलवामा में हुई मुठभेड़ के दौरान 3 आतंकियों को मौत के घाट उतारा था।

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पुलवामा मुठभेड़ में 3 आतंकियों को उतारा था मौत के घाट, अब राष्ट्रपति करेंगे जवान को सम्मानित

भिंड/ भारतीय सेना के जाबाज जवान मध्य प्रदेश के भिंड जिला मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूर चौम्हो गांव के रहने वाले कुलदीप सिंह भदौरिया ने बड़ी ही बहादुरी के साथ 9 महीने पहले पुलवामा में हुई मुठभेड़ के दौरान 3 आतंकियों को मौत के घाट उतारा था। उनकी इस बहादुरी के चलते अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जवान कुलदीप सिंह को सेना मेडल से सम्मानित करेंगे। बतां दें कि, कुलदीप अपने परिवार की पहली पीढ़ी हैं, जो देश सेवा के लिए भारतीय सेना में शामिल हैं। कुलदीप के पिता धीरसिंह भदौरिया के मुताबिक, उनके बेटे के अंदर देश सेवा का ऐसा जज्बा था कि उन्होंने साल 2004 में ग्वालियर में सेना की भर्ती देखी और पहले प्रयास में ही चयनित हो गए। फिलहाल, वो अमृतसर में पदस्थ हैं।

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राष्ट्रपति सम्मानित करेंगे वरना...

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में कुलदीप को सेना मेडल मिलने की घोषणा हो चुकी है। फिलहाल, अब सिर्फ इस बात का इंतजार है कि, राष्ट्रपति कब कुलदीप को अपने हाथों से सम्मानित करेंगे। जानकारी के मुताबिक, अगर किन्हीं कारणाें के चलते राष्ट्रपति मेडल नहीं लगा पाते हैं तो सेना के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कुलदीप को इस मेडल से सम्मानित किया जाएगी। कुलदीप जिले से सेना मेडल पाने वाले 12वें सैनिक होंगे। कुलदीप की इस उपलब्धि से उनके परिवार और गांव को बेहद खुशी है। साथ ही प्रदेश समेत देशभर को गर्व।

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कुलदीप ने सुनाई पुलवामा मुठभेड़ की कहानी

एक हिन्दी अखबार को दिये इंटरव्यू में सैनिक कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि, 'मई 2019 के महीने में उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में थी। 18 मई की रात 11.30 बजे भारतीय सैन्य अधिकारियों को सूचना मिली कि पुलवामा के पंचगांव में तीन आतंकी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए एके 47 लेकर रुके हैं। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने सैनिकों की एक टीम गठित करके आतंकियों को पकड़ने के लिए भेजी। इस टीम में कुलदीप भी शामिल थे। सर्चिंग के दौरान टीम के सामने से तीन आतंकी एके 47 राइफल लेकर निकले। मैंने उनको रोका, लेकिन उन्होंने फायरिंग शुरु कर दी। मौका पाकर तीन में से दो आतंकी एक घर में जा घुसे। वहीं, एक आतंकी घर के बाहर से फायरिंग करता रहा। मैंने उसपर फायर किया तो वो मौके पर ही ढेर हो गया। उसके बाद मैंने पूरी टीम के सहयोग से घर की घेराबंदी करते हुए दोनों आतंकवादियों को मार गिराया।'