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ंजीवन सुधार के लिए जरूरी है ब्रह्मचर्य व्रत

गणाचार्य विराग सागर ने पर्यूषण पर्व के अवसर पर यहां चल रही धर्मसभा में गुरुवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन मंगल उद्बोधन

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Gaurav Sen

Sep 15, 2016

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भिण्ड . गणाचार्य विराग सागर ने पर्यूषण पर्व के अवसर पर यहां चल रही धर्मसभा में गुरुवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि आज पर्यूषण पर्व का यह 10वां दिन है। दश यानी वश । हम सभी कितने दिनों से पर्यूषण में करने वाली साधना के भाव संजोये थे और बड़े मनोयोग से पर्यूषण पर्व के एक- एक दिन को व्यतीत किया है। आज पर्यूषण पर्व का अंतिम दिन है। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म अलग है और ब्रह्मचर्य व्रत अलग है। व्रत को धारण किया जाता है, पालन किया जाता है जबकि धर्म आत्मा का स्वभाव है।आचार्यश्री ने कहा व्यक्ति की दृष्टि पर ब्रेक होना चाहिए क्योंकि जब दृष्टि पर काबू नहीं रहता तो मन में वासनाये भड़क सकती हैं। महिलायें अग्नि की तरह होती हैं और पुरूष घी की तरह । जिस प्रकार अग्नि के पास आने से घी या मोम पिघल जाता है वैसे ही महिलाओं के पास में आने से पुरूष का हृदय भी पिघल जाता है। इसके परिणाम खराब हो सकते हैं। इसलिए हमारे आचार्यों ने कहा है कि स्त्रियों से दूर रहना चाहिए। उनके पास ज्यादा बैठना उठना नहीं चाहिए। आचार्य श्री ने कहा पुराने समय में घूॅघट की परम्परा थी घूॅघट किसी की स्वतंत्रता को नष्ट करने के लिए नहीं अपितु संस्कृति की सुरक्षा करने के लिए होता था। बडे-बडे राज घरानों में भी रानियॉ रहती थीं तो वे किसी की दृष्टि में नही आती थीं। उनके निवास के स्थानों पर भी सहसा कोई पुरुष प्रवेश नहीं कर सकता था। वे बाहर भी निकलती थीं तो उनका चेहरा भी कोई नहीं देख पाता था। इतना घूॅघट और सुरक्षा रहती थी। लेकिन आज ये सारी संस्कृतियॉ नष्ट होती जा रही हैं। आज की महिलायें, बच्चियां खुले आम श्रृंगार करके घूमती हैं । अपना रूप जन-जन को दिखाने में वे खुशी मानती हंै। जबकि श्रंृगार का इतिहास जहां दिया है वहां स्पष्ट लिखा है कि पत्नी का सारा श्रंृगार अपने पति को रिझाने, प्रसन्न करने और उसे ही दिखाने के लिए होता है न कि आम जन के लिए। आचार्यश्री ने कहा कि माता- पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें और बच्चे भी अपनी धर्म संस्कृति की रक्षा करें। संतजन ब्रह्मचर्य महाव्रत के धारी होते हैं।
उनकी इतनी पवित्र दृष्टि होती है कि वे संपूर्ण स्त्री जाति को अपनी मां बहन और बेटी की तरह देखते हंै। उनके जीवन में ब्रह्मचर्य व्रत की निर्मलता से अनेको चमत्कार सिद्धियां हो जाती हैं। इसलिए अपने जीवन में शक्ति अनुसार ब्रह्मचर्य व्रत का अवश्य पालन करना चाहिए। आज धर्मसभा में पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन भी प्रवचन सुनने पहुंचे तथा उन्होंने विराग सागर से आशीर्वाद लिया।