भिवाड़ी. औद्योगिक क्षेत्र में झाड़ी, खर पतवार, जंगल, घास फूस को हटाने के लिए रीको द्वारा टेंडर तो खूब किए जा रहे हैं। लेकिन इन टेंडर के बाद झाडिय़ों और घास खूब उग रही है। ठेकेदार इन्हें हटाने की वजह इन्हें सींचने का काम कर रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र खुशखेड़ा, कारोली सहित आसपास के क्षेत्र में रीको द्वितीय शाखा द्वारा सडक़ साइड और इधर-उधर उगने वाली घास फूस को हटाने के लिए 34.25 लाख के अलग-अलग टेंडर किए। लेकिन इनका धरातल पर असर नजर नहीं आता है। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में टीएमटी चौक से थाने की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग हो या फिर अन्य सडक़ सभी जगह रोड साइड और डिवाइडर पर झाड़ उगे हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में झाड़ उगे होने से यहां काम को आने वाले श्रमिकों को भी खतरा बना रहता है। असामाजिक तत्व इनमें छिपकर वारदात को अंजाम दे देते हैं। पैदल चलते मजदूरों से मोबाइल और पैसे छीनने की वारदात को अंजाम दे देते हैं। पुलिस की गश्त भी प्रभावी नहीं होती।
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ये टेंडर लगाए
रीको द्वितीय शाखा द्वारा खर पतवार झाडिय़ों की सफाई के लिए खुशखेड़ा में 9.55 लाख का एक टेंडर आठ मई को लगाया। कारोली औद्योगिक क्षेत्र में झाडिय़ों की सफाई के लिए 5.83 लाख का एक टेंडर 15 जुलाई को लगाया। टपूकड़ा औद्योगिक क्षेत्र में झाडिय़ों को हटाने के लिए एक टेंडर 28 जुलाई को 2.53 लाख का लगाया गया। पथरेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में झाडिय़ों को हटाने के लिए एक टेंडर 28 जुलाई को 4.53 लाख रुपए का लगाया गया। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में हटाने के लिए एक टेंडर 15 जुलाई को 2.93 लाख रुपए का लगाया गया। चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में 15 जुलाई को एक टेंडर जंगल हटाने के लिए 8.88 लाख रुपए का लगाया गया। सभी क्षेत्र में मिलाकर 34 लाख से अधिक के टेंडर लगाए गए हैं। टेंडर भी सभी क्षेत्र के लिए अलग हैं जिससे कि काम को छोटे टुकड़ों में बांटकर अच्छी तरह से किया जा सके। लेकिन इसके बावजूद उसका असर नहीं दिख रहा है।
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नए उद्यमियों को हिचकिच
औद्योगिक संगठन भी उद्योग क्षेत्र में सफाई न होने की बात रीको के सामने समय-समय पर उठाते रहते हैं। रीको द्वारा भी समय समय पर इसके लिए टेंडर किए जाते हैं। लेकिन इतना पैसा खर्च होने के बावजूद उसका जमीन पर असर दिखाई नहीं देता। औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति खराब दिखती है जिससे नए उद्यमियों को आने में हिचकिचाहट होती है।
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अभी मैंने कार्यभार संभाला है, टेंडर के कार्यादेश जारी हुए हैं या नहीं इस बारे में स्थिति देखकर ही बता सकूंगा।
परेश सक्सेना, यूनिट हेड, रीको