
भूमिगत केबल बिछाने से पहले बेचने वाले अभी तक बच रहे
भिवाड़ी. विद्युत निगम भिवाड़ी उपखंड कार्यालय में एक के बाद एक घपले, घोटाले और गड़बड़ के मामले उजागर हुए। लेकिन सभी मामलों में कार्रवाई अभी तक लंबित है। निगम के स्थानीय से लेकर उच्च स्तरीय अधिकारी लापरवाह कार्मिकों पर कार्रवाई से बचते दिख रहे हैं। खुशखेड़ा में 220 केवी जीएसएस के सामने स्थित डीएलजेएम कंपनी के पास भूमिगत केबल बिछाने से पहले बेचे जाने के मामले में भी अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
केबल बिछाने के मामले में लीपापोती किए जाने का मामला छह महीने पहले उजागर हुआ था। काम 2022 में स्वीकृत कराया गया। जेईएन बंटू सिंह को काम कराना था, लेकिन जेईएन ने तय अवधि में काम नहीं कराया। इसके बाद जेईएन की पदोन्नति हो गई और वह एईएन चिकानी हो गए। इसके बाद वापस लौटकर भिवाड़ी उपखंड में एईएन सतर्कता के पद पर तैनाती मिल गई। तब जाकर एईएन सतर्कता बंटू ङ्क्षसह ने 2023 में उपखंड कार्यालय में लिखकर दिया है कि खुशखेड़ा में डीएलजेएम कंपनी के पास कराए गए काम को करा दिया गया है। इस संबंध में बंटू ङ्क्षसह से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने समय पर काम नहीं किया, इसलिए देरी हुई। लेकिन सवाल उठता है कि जब सब कुछ सही था तो उन्हें लिखकर देने की जरूरत क्यों पड़ी। निगम का कोई भी टेंडर है तो उसे वर्तमान एईएन जेईएन को पूरा करना होता है। किसी अभियंता के तबादला होने के बाद उसकी जगह लगाए गए अन्य अभियंता द्वारा काम कराया जाता है। न कि पूर्व में तबादला होकर गए अभियंता द्वारा।
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मामले में इस तरह हुई गड़बड़
विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार विद्युत निगम से करीब 600 मीटर केबल बिछाने के लिए स्वीकृत कराई गई। जिसकी कीमत करीब नौ लाख रुपए बैठती है। स्वीकृत केबल को जिम्मेदार अभियंताओं ने कई महीने तक मौके पर बिछाया ही नहीं। पहले होंडा चौक जीएसएस में रखा और मौका मिलने पर बेच दिया। बाद में इस मामले की भनक कुछ विभागीय अभियंताओं को लगी। लेकिन मामले को वहीं दबा दिया गया। लेकिन मामला इस शर्त पर दबाया गया कि मौके पर केबल बिछानी होगी। इसके बाद तत्कालीन जेईएन और वर्तमान एईएन विजिलेंस बंटू ङ्क्षसह ने मौके पर केबल बिछाई। लेकिन उक्त केबल दो अलग कंपनियों की है और इस पर दो अलग-अलग वर्ष भी अंकित हैं। साथ ही केबल की दूरी भी कम है। इससे साफ स्पष्ट होता है कि निगम द्वारा जो केबल मौके पर बिछाने के लिए दी गई वह नहीं बिछाकर दूसरी लगाई गई है, इस तरह निगम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है। बाद में मामला उछलने पर लीपापोती करने की कोशिश हुई है।
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कई महीने तक कनेक्शन नहीं
दूसरा सवाल है कि अगर मौके पर केबल बिछाने की जरूरत थी तो उससे कनेक्शन क्यों नहीं दिए गए। केबल बिछने के बाद भी उसे कई महीने तक लाइन से नहीं जोड़ा गया। इसका मतलब मौके पर मौजूद सिस्टम से ही आपूर्ति सकती थी। जब मौके पर मौजूद सिस्टम ठीक था तो फिर दूसरी केबल बिछाने की जरूरत क्यों पड़ी। कहीं ये निगम की केबल और अन्य उपकरणों को बेचने की साजिश तो नहीं थी।
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इस मामले में जांच कराई गई थी, उसकी भौतिक रिपोर्ट मुख्यालय में उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारी ही करेंगे।
सीताराम जांगिड़, एक्सईएन, विद्युत निगम
Published on:
09 Dec 2023 06:38 pm
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