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नौ महीने की देरी से पूरा हो रहा बायपास सडक़ चौड़ीकरण प्रोजेक्ट

सौंदर्यीकरण के बाद बाजार के माहौल में आया परिवर्तन करीब 45 करोड़ रुपए है प्रोजेक्ट की लागत

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भिवाड़ी. बायपास सडक़ के चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के काम में देरी हुई। करीब नौ महीने की देरी के बाद सडक़ चौड़ीकरण एवं डामरीकरण का काम पूरा हो चुका है, इससे बायपास के बाजार का अलग ही नजारा देखने को मिलता है। शाम के समय चौड़ी सडक़ों से गुजरता यातायात, सडक़ के दोनों ओर बाजार दुकानों के बाहर खड़ी गाडिय़ों से किसी बड़े शहर जैसा माहौल नजर आता है। लेकिन प्रोजेक्ट में देरी होने से मामला गड़बड़ा रहा है। लंबा काम चलने से ट्रैफिक का डायवर्जन, खुदाई के दौरान धूल मिट्टी उडऩे सहित अन्य प्रकार की परेशानी आमजन को झेलनी पड़ी हैं। प्रोजेक्ट को शुरू करते समय खत्म करने की तिथि सितंबर 2023 रखी गई थी। प्रोजेक्ट शुरू होते ही तमाम तरह की अड़चनों की वजह से विलंब होता गया। पहले इसे पूरा करने के लिए मार्च 2024 निर्धारित किया गया। अब 30 जून तक का समय रखा गया है। बायपास पर 37.86 करोड़ रुपए से विकास कार्य हो रहे हैं। खिजूरीबास टोल से धारूहेड़ा मोड तक 4.15 किमी में सडक़ को दो से चार लेन में चौड़ीकरण, फुटपाथ, वॉक वे, वाटर हार्वेस्टिंग, नाली निर्माण के साथ पौधारोपण एवं हरियाली विकसित की जाएगी। प्रोजेक्ट में अभी तक 20 करोड़ के काम हो चुके हैं। प्रोजेक्ट की नींव 16 सितंबर 2022 को रखी गई थी। तब योजना को पूरा करने के लिए एक साल की अवधि रखी गई थी लेकिन अभी तक इस काम को पूरा होने में नौ महीने की देरी हो चुकी है। प्रोजेक्ट से जुड़े अभियंताओं के अनुसार काम पूरा होने में 30 जून तक का समय लगेगा।

प्रोजेक्ट में ये काम हुए

सडक़ पर डामरीकरण एवं डिवाइडर का काम शत प्रतिशत पूरा हो चुका है। डिवाइडर पर स्ट्रीट लाइट का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। ग्रीन बेल्ट 95 फीट वाली लाइन में खिजूरीबास टोल से धारूहेड़ा मोड की तरफ टाइल्स लगाने का काम 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। फेंसिंग लगाने का काम भी अंतिम चरण में है। ग्रीन बेल्ट में बिजली के खंबे लगने हैं, यह काम शुरू हो चुका है। पौधारोपण का काम गर्मी की वजह से अभी शुरू नहीं हुआ है, इसे बारिश में ही किया जाएगा। धारूहेड़ा मोड से टोल की तरफ 55 फीट चौड़ाई में फुटपाथ का काम शुरू हो चुका है। नालियों का काम पूरा हो चुका है।

प्रोजेक्ट में देरी की वजह

प्रोजेक्ट में देरी के कई कारण बीडा अभियंता बता रहे हैं। प्रोजेक्ट में सात करोड़ रुपए से बिजली की लाइन भी भूमिगत की गई हैं। इस काम को करने में काफी समय लगा है। बीडा के पास इलेक्ट्रिकल के अनुभवी अभियंता नहीं होने एवं विद्युत निगम से शटडाउन नहीं मिलने की वजह से बिजली लाइन का काम काफी देरी से हुआ। इसके साथ ही आरएचबी स्थित एसटीपी से थड़ा को जाने वाली शोधित पानी की लाइन सडक़ के बीच में आ गई। इस लाइन को शिफ्ट करने में काफी समय लगा। नगर परिषद ने तीन बार टेंडर किया जब जाकर इसे बदला जा सका। इसके साथ ही अतिक्रमण को हटाने में देरी हुई। ग्रेप की पाबंदी की वजह से भी काम को रोकना पड़ा।

ये फायदे : प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यातायात को गति मिलेगी। बायपास का माहौल बड़े शहरों की तरह होगा। लोग रोड साइड में गाड़ी खड़ी कर चार किमी तक पैदल घूमकर खरीदी कर सकेंगे।

ये नुकसान - प्रोजेक्ट में देरी से सडक़ एवं अन्य निर्माण के दौरान खुदाई होने से धूल-मिट्टी उड़ती है, जिससे व्यापार प्रभावित होता है। ट्रैफिक रोकने से वाहन चालकों को असुविधा होती है।

प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण में है, कुछ ही दिनों में सभी काम पूरे हो जाएंगे।
अशोक मदान, एक्सईएन, बीडा