
भिवाड़ी. औद्योगिक क्षेत्र और अव्यवस्था एक दूसरे के पूरक बन गए हैं। उद्यमियों ने सिस्टम की कमी के साथ उत्पादन करना सीख लिया। अधिकारियों के पास व्यवस्था सुधारने की कार्ययोजना नहीं है। तभी तो खुशखेड़ा, सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में दूषित पानी चारों तरफ भरा हुआ है और रीको इस समस्या का समाधान नहीं कर रही है। औद्योगिक क्षेत्र में जब नए निवेशक भूखंड देखने जाते हैं, तब उन्हें जलभराव वाले रास्ते और स्थलों से दूर रखा जाता है। लेकिन एक बार यहां भूखंड खरीदकर उत्पादन शुरू करने वाले निवेशक दूषित पानी की बदबू से बच नहीं पाते। उद्योग क्षेत्र में जलभराव के कई स्थल हैं जहां कि दूर-दूर तक दूषित, काला, केमिकल का बदबूदार पानी भरा हुआ है। इसमें दूर से बदबू आती है। रीको के पास इसके समाधान के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। एक तरफ औद्योगिक क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है वहीं दूसरी तरफ फैक्ट्रियों से निकले दूषित पानी का शोधन करने में रीको विफल हो रही है। औद्योगिक क्षेत्र सलारपुर खुशखेड़ा, कारोली में उद्योगों को रीको ने दूषित पानी के शोधन और दोबारा उपयोग की शर्त पर जमीन आवंटित की है। आवंटन शर्तों के अनुसार उद्योगों को दूषित पानी का शोधन कर दोबारा उपयोग करना होगा लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उक्त औद्योगिक इकाइयों में लगे ईटीपी प्लांट की जांच नहीं करते। फैक्ट्री संचालक ईटीपी संचालन की लागत बचाने के लिए प्लांट को बंद रखते हैं और दूषित पानी को खुले नालों में छोड़ देते हैं। थापर इंडस्ट्री के पास दूर-दूर तक दूषित पानी भरा है। जमीन में कई फीट गहराई तक दूषित पानी भरा हुआ है। इसके साथ ही रीको ने एक स्थान पर बारिश जल संचयन के लिए जोहड़ की चारीदीवारी कराई है लेकिन उसमें भी नालों का दूषित पानी भरता है। जोहड़ के पानी में भी दूर से बदबू आती है। खुले नालों से दूषित पानी जोहड़ के अंदर घुसता है। उद्योग क्षेत्र में चारों तरफ दूषित पानी मिलने से औद्योगिक वातावरण खराब होता है।
फैक्ट्रियों का जो सीटीओ है, उसके अनुसार उत्पादन, दूषित पानी के शोधन और ईटीपी संचालन में कोई गड़बड़ है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
दूषित पानी के शोधन के लिए एसपीवी को जमीन दी जाएगी। सीईटीपी निर्माण के लिए सरकार फंड देती है। दूषित पानी के शोधन के प्रयास तेज किए जाएंगे।
अजय गुप्ता, जीएम सिविल, रीको
Published on:
02 Jan 2026 06:03 pm
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