
जिम्मेदार अधिकारी नहीं करते कार्रवाई , निवेशक होते हैं प्रभावित
भिवाड़ी. रीको के औद्योगिक क्षेत्र में बोई गई फसल पककर तैयार हो चुकी है। औद्योगिक भूखंड में गेहूं और सरसों की फसल स्थानीय जनों ने बोई थी, अब इनके पकने की तैयारी है। रीको क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में ऐसे स्थल हैं जहां कई बीघा में स्थानीय जनों ने फसल उगाकर तैयार की है। रीको के भूखंड में फसल बोने का यह सिलसिला निरंतर चल रहा है लेकिन स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही से इस पर रोक नहीं लग रही है। रीको अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं, जिसकी वजह से रीको भूमि का दुरुपयोग हो रहा है। रीको ने भूखंड की चारदीवारी कराने में करोड़ों रुपए का बजट खर्च किया है कि जिससे कि कब्जे नहीं हो, इसके बावजूद यहां फसल बोई जा रही है। इस मिलीभगत की फसल में किसकी हिस्सेदारी है, इससे पर्दा उठना जरूरी हो गया है। इस संबंध में रीको अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। मैसेज का भी जबाव नहीं दिया।
एक जगह कार्रवाई कर लौटे
रीको यूनिट द्वितीय ने पथरेड़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित पार्क में बोई गई फसल को नष्ट किया था। रीको अधिकारियों की गुपचुप कार्रवाई पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रीको अधिकारियों की कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गई है। पथरेड़ी में अब्दुल्ला मार्केट के सामने स्थित पार्क में बोई गई फसल को रीको अधिकारियों ने नष्ट कर दिया लेकिन वहां पास में ही स्थित रीको के दर्जनों भूखंड में फसल लहलहा रही है, उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस तरह एक जगह कार्रवाई और दर्जनों पर मेहरबानी से बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर किसी एक कार्रवाई से रीको अधिकारी खानापूर्ति करना चाहते हैं। मुख्यालय से आए नोटिस का जबाव देने के लिए कार्रवाई की गई है। मुख्यालय के अधिकारियों को भी अंधेरे में रखे जाने की कोशिश की जा रही है। चौपानकी, पथरेड़ी, बंदापुर, खुशखेड़ा, सलारपुर, कारोली सभी जगह रीको की जमीनों में फसल लहलहा रही हैं फिर एक जगह कार्रवाई कर रीको अधिकारी क्या साबित करना चाहते हैं। साथ ही गुपचुप कार्रवाई से भी सवाल खड़े हो रहे हैं, अतिक्रमण हटाने की जो कार्रवाई की, उसमें भी किसी को खबर नहीं दी।
थाने के पीछे से क्यों लौट
पथरेड़ी पार्क में फसल नष्ट करने के बाद रीको अधिकारी चौपानकी थाने के पीछे स्थित भूखंड पर पहुंचे। यह भूखंड कई बीघा में है। यह रीको का सर्विस एरिया है, जिसमें अब फ्लैटेड फैक्ट्री प्रस्तावित है, फिलहाल उक्त भूखंड पर गेहूं और सरसों की फसल लहलहा रही है। यहां भी मामूली फसल को नष्ट किया गया है। एक तरफ पथरेड़ी स्थित पार्क की पूरी फसल नष्ट कर दी, दूसरी तरफ चौपानकी थाने के पीछे स्थित जमीन पर बोई गई फसल को सिर्फ थोड़ी जगह (कुछ मीटर) में नष्ट किया। इस तरह एक दिन में एक जैसे दो मामलों में रीको की कार्रवाई के अलग-अलग तरीके से सवाल खड़े होते हैं। रीको के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े होते हैं। अधीनस्थ किस तरह की कार्रवाई करने के बाद क्या फीडबैक भेज रहे हैं। इसकी भी अन्य तरीके से निगरानी की जानी चाहिए।
सडक़ों पर पार्किंग, गोदाम, कचरा पर मौन क्यों
सिर्फ एक जगह फसल को नष्ट करने में रीको यूनिट द्वितीय ने तत्परता दिखाई। खुशखेड़ा, कारौली, टपूकड़ा, पथरेड़ी, बंदापुर, चौपानकी में दर्जनों स्थानों पर सडक़ पर पार्किंग बनाई गई है। पार्किंग के लिए सडक़ पर पक्के निर्माण किए गए हैं। रास्तों को बंद कर दिया गया है। सडक़ पर ही फैक्यिों के कच्चे और तैयार माल पड़े हुए हैं, जिससे गोदाम की तरफ उपयोग किया जाता है। सडक़ पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, जिनमें आग लगने से धुंआ उठता है। दूर से बदबू आती है। इसी तरह सडक़ पर कड़वी रखकर और उपले बनाकर रखे हुए हैं, जिससे उद्योग क्षेत्र की छबि ही धूमिल हो जाती है, इन समस्याओं पर रीको अधिकारी कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं। सडक़ के दोनों तरफ हरियाली के लिए छोड़ी गई जमीन पर भी पक्के निर्माण कर लिए गए हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में फसल उगाने से निवेश का माहौल प्रभावित होता है। फसल कृषि भूमि पर बोनी चाहिए। कई बार फसल होने की वजह से निवेशक को फैक्ट्री प्लांट लगाने में परेशानी आती है, उसके प्रोजेक्ट में देरी हो जाती है।
प्रदीप पटेल, अध्यक्ष, केकेआईए
Published on:
25 Feb 2026 05:48 pm
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