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औद्योगिक उत्पादों के भ्रामक आंकड़े पेश करते रहे विभाग

भिवाड़ी. खुशखेड़ा पटाखा हादसे के बाद प्रशासन और अन्य विभागों की संयुक्त टीम मिलकर उद्योग क्षेत्र में सर्वे कर रही है। किस फैक्ट्री में क्या उत्पादन हो रहा है। छह दिन के सर्वे में इतना साबित हो चुका है कि अभी तक संबंधित विभागों के पास जो आंकड़े थे, उनकी कोई सार्थकता नहीं थी। इसके […]

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

Feb 24, 2026

हादसे के बाद जांच एवं सर्वे में निकल रही हकीकत

भिवाड़ी. खुशखेड़ा पटाखा हादसे के बाद प्रशासन और अन्य विभागों की संयुक्त टीम मिलकर उद्योग क्षेत्र में सर्वे कर रही है। किस फैक्ट्री में क्या उत्पादन हो रहा है। छह दिन के सर्वे में इतना साबित हो चुका है कि अभी तक संबंधित विभागों के पास जो आंकड़े थे, उनकी कोई सार्थकता नहीं थी। इसके साथ ही सरकार के जो विभाग औद्योगिक डाटा एकत्रित करते हैं, उनके सर्वे और रिपोर्ट पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। एक तरफ जिम्मेदार विभाग अवैध पटाखा फैक्ट्री को पकडऩे में नाकाम रहे और धमाका हो गया, जिसमें आठ श्रमिकों की मौत हो गई। दूसरी तरफ सभी विभागों की लापरवाही उजागर हो गई है कि उनके पास औद्योगिक क्षेत्र का कोई अधिकृत डाटा ही नहीं है। अधिकृत डाटा नहीं है तभी तो हादसे के बाद सर्वे और जांच करने में जुटे हैं। अभी तक 2103 इकाइयों की जांच की गई है जिसमें से 837 में विभागीय मानक पूरे नहीं होने पर नोटिस दिए गए हैं।

रीको का बुरा हाल
अवैध पटाखा फैक्ट्री मामले में रीको के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। रीको ने किस उद्देश्य से भूखंड आवंटन किया, इसकी जिम्मेदारी रीको को ही रखनी होगी। अगर रीको की कार्यप्रणाली को देखें तो स्थिति और भी खराब देखने को मिल सकती है। रीको ने गार्मेंट, इलेक्ट्रोनिक और ऑटो जोन बनाए हैं। इनमें भूमि आवंटन सामान्य जोन की अपेक्षा कम दर पर होता है। नीलामी में भी सामान्य जोन की अपेक्षा कम दर होती है। आवंटी एक बार यहां भूखंड लेने के बाद विशेष जोन के अनुसार उत्पादन करता है, बाद में बंद कर देता है। ऐसी कम दर पर खरीदे गए भूखंड को ऊंची दर पर किराए पर उठा देता है। अगर रीको के विशेष जोन की पड़ताल की जाए और प्रशासन जांच करे तो मामला विपरीत निकलेगा। इलेक्ट्रोनिक जोन में संबंधित उत्पाद को छोडक़र अन्य उत्पाद की फैक्टरी लगी हुई हैं। आवंटी को उत्पाद बदलने पर रीको को जानकारी देनी होती है, ऐसा आवंटन शर्तों में उल्लेखित होता है। जानकारी नहीं देने पर रीको के पकडऩे पर जुर्माने का प्रावधान है। जब नियम है तो रीको भी किस फैक्टरी में क्या उत्पादित हो रहा है, इसकी जिम्मेदार होगी।

इनकी भी जिम्मेदारी
रीको के साथ उद्योग क्षेत्र के आंकड़े जिला उद्योग केंद्र और सांख्यिकी विभाग के पास होते हैं। उद्योगों की जानकारी जिला उद्योग केंद्र के पास होनी चाहिए, जिला उद्योग केंद्र उद्योग मंत्रालय का विभाग है। इसके साथ ही सरकार सांख्यिकी विभाग से डाटा लेती हैं, साख्यिकी विभाग के पास भी उद्योगों और उनके उत्पाद के आंकड़े होने चाहिए लेकिन संबंधित विभाग वास्तविक आंकड़ों की जगह कागजी कार्रवाई करने में विश्वास रखते हैं।

उत्पाद की हो जांच
रीको की ओर से आवंटित भूखंड में और बाद में विक्रय होने के बाद फैक्टरी में उत्पादित वस्तु की जांच की जाती है। इसके लिए रीको कुछ दस्तावेज आवंटी और खरीदार से मांगती है लेकिन इसी दौरान रीको में संबंधित अधिकारी मिलीभगत कर लेते हैं। मिलीभगत से उत्पादन की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर लेते हैं। जिसकी वजह से वास्तविक आंकड़े नहीं मिलते।