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रीको के लिए सिर्फ महंगी नीलामी, खुद के भूखंड बेचकर करोड़ों की कमाई

औद्योगिक भूखंड पर बिचौलियों की चाल

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रीको के लिए सिर्फ महंगी नीलामी, खुद के भूखंड बेचकर करोड़ों की कमाई

रीको के लिए सिर्फ महंगी नीलामी, खुद के भूखंड बेचकर करोड़ों की कमाई


भिवाड़ी. रीको औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड के भाव ऊंचे करने में दलाल एवं बिचौलिए सक्रिय हैं। पहले तो रीको की नीलामी में भूखंड की दरों को आसमान में पहुंचाते हैं, फिर खुद के भूखंड की खरीद-फरोख्त कर करोड़ों के बारे-न्यारे करते हैं। आजकल कुछ यही रुझान देखने को मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण सामने आया जब रीको ने सितंबर में सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में ई-वेस्ट (इलेक्ट्रोनिक कचरा) का निष्पादन करने वाले दो भूखंड की नीलामी की। अमानत राशि जमा होने के बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह में नीलामी लगी। दोनों भूखंड पर रिकॉर्ड तोड़ 90 उद्यमियों ने बोली लगाई। तीन दिन चलने वाली नीलामी आखिरी दिन भी रात को दो बजे तक चली। लेकिन एक महीने बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ये कोई उद्यमी न होकर बिचौलियों का समूह था, जिसने जानबूझकर भूखंड की दरों को पांच गुना तक पहुंचाया और बाद में रीको द्वारा ऑफर लेटर दिए जाने के बाद एक महीने में 25 प्रतिशत राशि जमा नहीं कराई। इस बोली के भाव ऊंचे पहुंचने की वजह से औद्योगिक क्षेत्र में जिन निवेशकों ने पहले भूखंड खरीद रखे थे, उन्होंने बेचान करना शुरू कर दिया। जबकि इस नीलामी के बाद उद्योग क्षेत्र में कई भूखंड के ऐसे सौदे हुए हैं जिन्हें कुछ समय पहले 15 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर के भाव पर खरीदा और अब 30 हजार से अधिक दर पर बेचा है।
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इस तरह बढ़ाते गए दरें
ई-बेस्ट के आरक्षित भूखंड की दर 7200 रुपए प्रति वर्गमीटर रखी गई थी। क्योंकि ये भूखंड विशेष कैटेगरी के लिए थे। जबकि उद्योग क्षेत्र में अन्य भूखंड की नीलामी आरक्षित दर करीब 16 हजार रुपए है। इन भूखंड की 15 सितंबर से तीन अक्टूबर तक ईएमडी जमा हुई। चार से छह अक्टूबर तक ऑनलाइन बोली लगाने का अवसर दिया गया। एच 1- 101 के भूखंड के लिए 48 और एच 2- 102 भूखंड के लिए 42 निवेशकों ने ईएमडी जमा कराई। तीन दिन तक बोली लगाने के लिए जो समय मिला निवेशकों ने उस अवधि को भी पार कर दिया। दोनों भूखंड पर निवेशक अड़े रहे। एच 1-101 भूखंड को लेकर तक निवेशकों ने रात को दो बजे तक बोली लगाई। जिससे भाव 35010 रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गए। दूसरे भूखंड के भाव भी 30500 रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंचे। इस तरह दोनों भूखंड के भाव निवेशकों की अधिक संख्या होने की वजह से छह से सात गुना तक पहुंच गए। ई-वेस्ट के लिए नीलामी में इन भूखंड के भाव इतने ऊंचे पहुंचेंगे इसकी उम्मीद रीको अधिकारियों को भी नहीं थी।
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और निकली बिचौलियों की चाल
वैसे तो दोनों भूखंड पर बड़ी संख्या में बोलीदाता आए। लेकिन रीको अधिकारियों को शुरुआत में भी इसमें बिचौलियों और प्रॉपर्टी डीलर की चाल दिख रही थी। क्षेत्र में उद्योगों की जमीन को सस्ते में लेकर महंगे में बेचने वाले दलालों ने जड़ें मजबूत कर ली हैं। कुछ भूखंड को ऊंची नीलामी पर ले जाकर क्षेत्र में जमीन महंगी होने का माहौल बनाते हैं। जिससे कि पूर्व में खरीदे भूखंड को अच्छे भाव पर बेचा जा सके। नीलामी में सिर्फ पांच प्रतिशत ईएमडी जमा कर भाव को किसी भी दर तक पहुंचाया जा सकता है। प्लॉट न खरीदने पर ईएमडी ही जब्त होगी। दोनों भूखंड के लिए 90 बोलीदाता सामने आए, लेकिन 1.80 लाख रुपए सिर्फ दो अंतिम बोली लगाने वालों के ही जब्त होंगे।
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पूर्व में भी माफिया कर चुके कमाल
इंवेस्ट समिट नवंबर 2022 के बाद सलारपुर में निवेशकों को भूखंड बेचान करने की अनुमति दी गई। यहां पहली नीलामी हुई उसमें भी भूखंड को लेकर निवेशक टूट पड़े थे। लेकिन बाद में पांच बार हुई नीलामी में खरीदार कम ही दिखे। पहली नीलामी में निवेशकों ने आरक्षित दर से बहुत अधिक दर पर बड़े भूखंडों को भी खरीदा, जिससे अगली नीलामी में रीको ने नीलामी की आरक्षित दर ही दो गुना से अधिक कर दी।
13 जनवरी, 24 अप्रेल और 16 जून को 18 भूखंड के ऑक्शन लगाए गए, तीन बोली में सिर्फ 10 भूखंड ही नीलाम हुए।
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एक महीने में स्थिति हुई स्पष्ट
नीलामी पूरी होने के बाद अंतिम बोलीदाता को रीको एक महीने में 25 प्रतिशत राशि जमा करने के लिए प्रस्ताव पत्र देती है। एक महीने का समय निकल चुका है, बोलीदाता ने तय अवधि में राशि जमा नहीं की है। इससे स्पष्ट हो गया कि ई-वेस्ट के लए खरीदार नहीं होकर सिर्फ वे लोग थे, जो औद्योगिक क्षेत्र में जमीनों को महंगे दाम पर बेचने के लिए नए निवेशकों को गुमराह कर सकें।
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बोलीदाताओं को एक महीने में 25 प्रतिशत राशि जमा करने का प्रस्ताव पत्र दिया गया था। उनकी तरफ से उचित जबाव नहीं मिलने पर अमानत राशि को जब्त कर लिया जाएगा। शिवकुमार, यूनिट हेड, रीको